Digital Arrest Scam 130 Crore Duped From Elderly Scammers Posed As Cbi ats Officers
डिज़िटल अरेस्ट रहीं बुज़ुर्ग, बाहर चोर उड़ा ले गए कैश-जेवर
नवभारतटाइम्स.कॉम•
- एटीएस, सीबीआई और दिल्ली पुलिस का अधिकारी बनकर डराया
- गिरफ्तारी का वॉरंट भेजकर खातों में रकम ट्रांसफर कराईNBT रिपोर्ट, लखनऊ : साइबर जालसाजों ने एटीएस, सीबीआई और दिल्ली पुलिस के अधिकारी बनकर मर्चेंट नेवी के रिटायर्ड कैप्टन और एक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट कर 1.30 करोड़ रुपये से अधिक ठग लिए। जालसाजों ने दोनों को मनी लॉन्ड्रिंग और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का डर दिखाया। बुजुर्ग महिला से 78.50 लाख और रिटायर्ड कैप्टन से 52 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए गए।
तीन एफडी तुड़वाकर 78.50 लाख ट्रांसफर कराए
इंदिरानगर के रवींद्रपल्ली स्थित हरीनगर निवासी बुजुर्ग रत्ना कौल के पास 13 अगस्त की दोपहर वॉट्सऐप कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को एटीएस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर केनरा बैंक की मुंबई शाखा में खाता खोला गया है, जिसका संबंध अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से है। बाद में जालसाज एटीएस और सीबीआई अधिकारी बनकर उन्हें गिरफ्तार कर मुंबई जेल भेजने की धमकी देने लगे। पीड़िता को विडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखा गया। जालसाजों ने बैंक और डाकघर खातों की जांच के नाम पर सभी खातों की जानकारी ली और किसी से बात न करने की चेतावनी दी। जांच में सबकुछ सही मिलने पर क्लीन चिट देकर रकम वापस करने का झांसा दिया गया। वहीं मनी लॉन्ड्रिंग मिलने पर बुढ़ापा जेल में काटने की धमकी दी गई। आरोपितों ने पीड़िता से पीएनबी और एसबीआई की तीन एफडी तुड़वाकर रकम बचत खाते में ट्रांसफर करवाई। इसके बाद 78.50 लाख रुपये जालसाजों के बताए खाते में भेज दिए गए। डराने के लिए सुप्रीम कोर्ट और पुलिस विभाग की मुहर लगे फर्जी वॉरंट व अन्य दस्तावेज भी भेजे गए।
रिटायर्ड कैप्टन को गिरफ्तारी वारंट का डर
गोमतीनगर के विश्वासखंड-3 निवासी रिटायर्ड कैप्टन मोहन लाल आहूजा के पास 16 अगस्त को कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर जितेंद्र त्रिपाठी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड पर जारी सिम और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में हुआ है। गिरफ्तारी वॉरंट जारी होने का डर दिखाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया। सुप्रीम कोर्ट से कार्रवाई रुकवाने के नाम पर सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगा गया। एटीएस पुणे और ईडी के नाम पर भी धमकाया गया। 19 अगस्त की रात सिक्किम से लौटने के बाद 20 अगस्त को जांच के नाम पर उनसे दो खातों में 52 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। ठगी का एहसास होने पर दोनों पीड़ितों ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराई है।