'वेंटिलेटर से बात नहीं बने तो ECMO से बच सकती है जान'

नवभारतटाइम्स.कॉम
if ventilator doesnt work ecmo can save life life saving technology in severe heart lung diseases
nNBT न्यूज, लखनऊ : दिल और फेफड़ों के गंभीर रूप से फेल होने की स्थिति में ईसीएमओ (एक्स्ट्राकॉरपोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सिजनेशन) तकनीक मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है। जब वेंटिलेटर और दवाओं से भी मरीज की हालत नहीं संभलती, तब डॉक्टर ईसीएमओ का सहारा लेते हैं। इसमें मशीन कुछ समय के लिए फेफड़ों या दिल का काम खुद संभाल लेती है और शरीर के जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाती है। ईसीएमओ पर जाने वाले मरीजों में रिकवरी की दर करीब 30 से 40 फीसदी रहती है, लेकिन सफल इलाज के बाद मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं।

यह जानकारी शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एनेस्थीसिया विभाग की ओर से आयोजित ईसीएमओ कार्यशाला में विभागाध्यक्ष डॉ. पीके दास ने दी। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में मरीज के शरीर से खून निकालकर मशीन में भेजा जाता है। मशीन खून में ऑक्सीजन मिलाकर कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालती है और फिर शुद्ध खून वापस शरीर में भेज दिया जाता है, जिससे फेफड़ों को आराम मिलता है।
हर मरीज के लिए नहीं, फेफड़े-दिल को मिलता है संभलने का समय

संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने स्पष्ट किया कि ईसीएमओ सामान्य इलाज का विकल्प नहीं है। गंभीर निमोनिया, एआरडीएस (ARDS), अचानक फेफड़े फेल होने, सीवियर हार्ट फेल्योर और कार्डियक शॉक जैसी गंभीर स्थितियों में ही इसका इस्तेमाल होता है। पूर्व निदेशक व एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक मालवीय ने बताया कि ईसीएमओ सीधे बीमारी ठीक नहीं करती, बल्कि अंगों को संभलने का वक्त देती है। इस दौरान डॉक्टर संक्रमण और ब्लड प्रेशर नियंत्रित कर मूल बीमारी का इलाज करते हैं। सुधार होने पर मशीन का सपोर्ट धीरे-धीरे हटा लिया जाता है।