'पूर्णम्' ने सुनाई बेबस पिता की अनकही दास्तान

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purnam play the poignant tale of a helpless father a unique presentation of family irony and sacrifice
nNBT न्यूज, लखनऊ

पद्मश्री सम्मान से अलंकृत होने के बाद वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी का पहला नाटक 'पूर्णम्' शनिवार को राजभवन के सामने स्थित विश्वेश्वरैया हॉल में मंचित हुआ। दर्पण संस्था की ओर से प्रस्तुत इस नाटक ने अन्याय, पारिवारिक विडंबना और पिता के निस्वार्थ त्याग की एक ऐसी मार्मिक कथा उकेरी, जिसने सभागार में मौजूद हर दर्शक को सोचने और भावुक होने पर मजबूर कर दिया।
नाटक की कथा नीलकंठ नामक एक ऐसे निर्दोष पिता के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे गलत पहचान और अन्यायी परिस्थितियों के कारण वर्षों अपने परिवार से दूर रहना पड़ा। वर्षों बाद जब वह घर लौटता है, तो उसके सामने केवल अपने अतीत का सच साबित करने की चुनौती नहीं होती, बल्कि समय के साथ छूटे रिश्तों विशेषकर पिता-पुत्र के संबंध को दोबारा हासिल करने का कठिन संघर्ष भी होता है। नाटक यह प्रश्न खड़ा करता है कि यदि परिस्थितियां मनुष्य को उसके परिवार से दूर कर दें, तो क्या वह अपने कर्तव्य से मुक्त हो जाता है?