बच्चों के पुनर्वास और संरक्षण की समीक्षा हो: चीफ जस्टिस

Contributed byAnkur.Tiwari|नवभारतटाइम्स.कॉम
review of rehabilitation and protection of children chief justice
n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के 10 साल पूरे होने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की किशोर न्याय समिति, महिला एवं बाल विकास विभाग और यूनिसेफ के सहयोग से शनिवार को लखनऊ स्थित न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (जेटीआरआई) में राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श-2026 आयोजित किया गया। चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कहा कि यह केवल उपलब्धियों का जश्न मनाने का मौका नहीं है, बल्कि यह देखने का भी समय है कि यह कानून बच्चों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव ला पाया है।

उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और देखभाल राज्य व समाज दोनों की जिम्मेदारी है। बीते 10 वर्षों में किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समितियां, बाल देखरेख संस्थान, ऑनलाइन दत्तक ग्रहण व्यवस्था और निगरानी तंत्र मजबूत हुए हैं।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति राजन रॉय ने कहा कि किशोर न्याय व्यवस्था की सफलता का आकलन केवल मामलों के निस्तारण से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि कितने बच्चों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर जीवन का अवसर मिला। हाईकोर्ट किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजय भनोट ने बाल संरक्षण मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी मां के जेल में होने की स्थिति बने तो उसका खमियाजा बच्चे को नहीं भुगतना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान ‘उड़ान’ पुस्तक के तीसरे संस्करण का विमोचन किया गया। चीफ जस्टिस ने लखनऊ के ‘दृष्टि’ संस्थान के विशेष रूप से सक्षम बच्चों को आशीर्वाद दिया और उन्हें उपहार वितरित किए गए। जेटीआरआई की निदेशक रेखा अग्निहोत्री ने अतिथियों का स्वागत किया। दिनभर चले सत्रों में जिला न्यायाधीशों, पॉक्सो न्यायाधीशों, किशोर न्याय बोर्डों के प्रधान मैजिस्ट्रेटों, पुलिस, परिवीक्षा विभाग और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।