Nepal Tragedy Why Refuse Foreign Aid 500 Deaths 1500 Missing Threat Of Second Wave Of Disaster
इनकार क्यों
नवभारतटाइम्स.कॉम•
नेपाल की त्रासदी में मरने वालों का आंकड़ा 500 के पार जा चुका है, जबकि डेढ़ हजार से अधिक अब भी लापता हैं। राहत और बचाव कार्य के बीच नेपाल के सामने दोहरी चुनौती है। तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन की वजह से बनी झील में जलस्तर बढ़ रहा है। यानी, आपदा की दूसरी लहर भी आ सकती है। इस बीच काठमांडू ने विदेशी खोज और बचाव दलों के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
जवाब का इंतजार । भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नई दिल्ली ने NDRF की टीमें भेजने का प्रस्ताव दिया है, जिस पर जवाब का इंतजार है। नेपाल ने फिलहाल विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों की मदद लेने से इनकार किया है। उसका कहना है कि जहां जरूरत होगी, वहां विशेष तकनीकी मदद ली जाएगी। इस फैसले के पीछे 2015 के भूकंप का अनुभव बताया जा रहा है। तब बड़ी संख्या में विदेशी बचाव दल नेपाल पहुंच गए थे और उनके बीच कोऑर्डिनेशन में समस्या आई थी। नेपाल की चिंता अपनी जगह सही है, लेकिन फिर भी उसे अभी अधिकतम मदद की जरूरत है।समय कीमती । बेशक नेपाल का अपना सुरक्षा बल राहत कार्य को संभाल सकता है, पर यहां सवाल क्षमता का नहीं, टाइम मैनेजमेंट का है। इस तरह की आपदा में हर पल कीमती होता है। लापता लोगों तक जितनी जल्दी पहुंचा जा सकेगा, उनके बचने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। मिसिंग लोगों में भारत, चीन, अमेरिका, मलेशिया समेत लगभग 35 देशों के नागरिक हैं।
NDRF की विशेषज्ञता । NDRF के पास विदेशी जमीन पर मुश्किल परिस्थितियों में काम करने का अनुभव और विशेषज्ञता है। साल 2023 में जब तुर्किये में भूकंप ने तबाही मचाई, तब भी NDRF वहां पहुंची थी। हालांकि तुर्किये के साथ कूटनीतिक तनाव है। उस मानवीय मदद ने आम लोगों के बीच पुल का काम किया। 2011 में जापान में आई भूकंप, सुनामी और परमाणु रिएक्टर में रिसाव की तिहरी आपदा के समय भी NDRF की टीम खड़ी हुई थी।
सहयोग बढ़ाएं । नेपाल की फ्लैश फ्लड ने तीन देशों पर असर डाला है। ऐसे में आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत है, न कि उसे सीमित करने की। हो सकता है कि पिछला एक्सपीरियंस मन मुताबिक न रहा हो, पर उससे सीखा जा सकता है। दशक भर पहले की तुलना में आज ज्यादा बेहतर टूल और टेक्निक हैं। इनके जरिये पिछली परेशानियों को दूर किया जा सकता है।