‘लाइलाज नहीं जन्मजात मानसिक विकृतियां’

नवभारतटाइम्स.कॉम
congenital mental deformities are no longer incurable children can be healthy with timely treatment
n NBT न्यूज, लखनऊ: बच्चों में जन्मजात होने वाली मानसिक और शारीरिक विकृतियां अब लाइलाज नहीं हैं। सही समय पर पहचान और इलाज से बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। यह जानकारी शनिवार को एसजीपीजीआई (SGPGI) में आयोजित इंडियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोरेडियोलॉजी (ISNR) की मिड-टर्म CME 2026 में रेडियोडायग्नोसिस विभाग के प्रो. विवेक सिंह ने दी।

प्रो. सिंह के अनुसार, बच्चों में वैस्कुलर मैलफॉर्मेशन (नस संबंधी विकृतियां) जन्मजात होती हैं, जो गर्भावस्था के अल्ट्रासाउंड या जन्म के तुरंत बाद पकड़ में आ जाती हैं। अब 'न्यूरो-इंटरवेंशनल' और 'लिक्विड एम्बोलॉइजेशन' जैसी तकनीकों से दिमाग की नसों के गुच्छों और गांठों का बिना किसी बड़े चीर-फाड़ के सुरक्षित इलाज संभव है। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चों के दिमाग का सबसे तेज विकास शुरुआती 1 से 2 साल में होता है। आज भी 20 से 30% लोग जानकारी के अभाव या 'भगवान की मर्जी' मानकर इलाज में देर कर देते हैं। देरी होने पर बीमारी तो ठीक हो जाती है, लेकिन दिमाग पर हुए असर की भरपाई मुश्किल हो जाती है।