कार पूलिंग में साथ बढ़ती हैं कई कहानियां

नवभारतटाइम्स.कॉम•
car pooling not just a journey but a confluence of stories and environmental protection
वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद और मिट्टी- साथ में भरपूर समर्पण। बावजूद इसके कोई पौधा ठीक से पनप क्यों नहीं रहा? इंटरनेट से जानकारी तो मिली, पर संतुष्टि लायक नहीं। और शायद मिलती भी नहीं अगर पीयूष न मिलते। पांच घंटे के सफर में उन्होंने मिट्टी से लेकर बीजों की वैरायटी और इस सीजन में किचन गार्डन तैयार करने के टिप्स तक, हर जानकारी दे दी। पीयूष से मुलाकात हुई कार पूलिंग की वजह से।

कार पूलिंग का मतलब है एक ही दिशा में जाने वाले दो या अधिक लोगों का एक कार में साथ यात्रा करना। हालांकि इसे सिर्फ एक सुविधा मानना इससे जुड़े आनंद और दर्शन को कम करके आंकना है। जब एक ही राह पर चार अजनबी साझा यात्रा शुरू करते हैं, तो वह अनुभवों की यात्रा भी बन जाती है। हर शख्स का जीवन एक कहानी है, और जिसके इर्द-गिर्द हजारों कहानियां चल रही होती हैं। साथ बैठने पर मौका मिलता है उनको बांटने का। इसमें हम सीखते भी हैं और सिखाते भी हैं।
कार पूलिंग का दर्शन है 'मैं' से 'हम' की ओर बढ़ना। इसमें 'मेरा है' का भाव बदल जाता है 'हमारे में'। अपनी जगह, अपना समय और अपनी थोड़ी-सी सुविधा- इन सबमें दूसरों को भी हिस्सा देते हैं हम।

देखिए तो कार पूलिंग हमारी पूरी जीवन यात्रा का ही एक छोटा अंश लगेगा। जैसे जिंदगी का सफर किसी का अकेला नहीं होता। उसके साथ तमाम लोग चल रहे होते हैं, भले पता न हो, पर उनके बीच कनेक्शन होता है एक। कार पूलिंग में भी यही है। चार लोग, चार अलग व्यवहार, अलग जगह और अलग विचारों के एक जगह जुटते हैं और फिर बढ़ चलते हैं एक मंजिल के लिए।

यह मौका होता है अजनबी दुनिया में कुछ और परिचय बढ़ाने का। आमतौर पर शुरुआत बहुत ही औपचारिक होती है और कई बार होती भी नहीं। अनजान लोगों के सामने खुलना आसान नहीं! लेकिन, जैसे-जैसे गाड़ी रफ्तार पकड़ती है, सड़क पीछे छूटती जाती है, हिचक भी टूट जाती है। बातों का सिलसिला शुरू होता है, तो फिर रुकता ही नहीं।

कार पूलिंग सिखाती है जिम्मेदारी लेना इस पर्यावरण के प्रति। जनवरी 2025 में लोकसभा में रखी गई आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, कार पूलिंग के जरिये भारत में हर साल 38 करोड़ लीटर ईंधन बचाया जा सकता है। इससे करीब 8.8 लाख टन CO₂2 उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। जितनी तेजी से पर्यावरण बिगड़ रहा है और नेपाल जैसी त्रासदी की शक्ल में उसका परिणाम आ रहा है सामने, जरूरत है क्लाइमेट चेंज रोकने के लिए हर संभव कदम उठाने की। तो अगली बार कहीं निकलने से पहले सोच लीजिएगा यह सब।