Ghaziabad Power Crisis 6 Substations Overloaded Over 50 Thousand People Affected 4 5 Hours Of Outage
6 सबस्टेशन ओवरलोड, 50 हज़ार से अधिक लोग परेशान
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n आकाश तोमर, गाजियाबाद
शहर में बिजली व्यवस्था में सुधार पर बीते तीन साल में करीब 712 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बाद भी लोगों को पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। शहर में छह सबस्टेशन ओवरलोड चल रहे हैं, जिससे 50 हजार से अधिक लोग प्रभावित हैं। इनमें अकबरपुर बहरामपुर, बाबू बिहारीपुरा और लालकुआं के 10 एमवीए क्षमता वाले सबस्टेशन ओवरलोड हैं। इससे इन इलाकों में ट्रिपिंग, कटौती और ट्रांसफॉर्मर फुंकने की शिकायतें आ रही हैं। इससे लोगों के रोजमर्रा के कामकाज अस्त-व्यस्त हो रहे हैं। 2000 मेगावाट की मांग के मुकाबले करीब 1800 मेगावाट बिजली आपूर्ति की जा रही है। शहर में बिजनेस प्लान 2025-26 के तहत कार्य चल रहा है। इसके 70 प्रतिशत काम पूरे हो चुके हैं। इसके बाद भी करीब 45 ट्रांसफॉर्मर और 12 फीडर ओवरलोड हैं। इनमें पंचवटी, राकेश मार्ग, दौलतपुरा, पुरानी पंचवटी, कोर्ट गांव, गुलमोहर एन्क्लेव, भाटिया मोड़, नेहरू नगर और गांधी नगर शामिल हैं। एक सबस्टेशन से छह हज़ार लोगों को आपूर्ति
शहर के 40 में से छह 10 एमवीए क्षमता वाले सबस्टेशन ओवरलोड हैं। एक 10 एमवीए क्षमता वाले सबस्टेशन से औसतन करीब छह हजार लोगों को बिजली आपूर्ति की जाती है, लेकिन आबादी बढ़ने, नए आवासीय क्षेत्रों के विकसित होने और गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने से इन सबस्टेशनों पर भार लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण क्रिश्चियन नगर बागू के करीब 10 हजार, अकबरपुर बहरामपुर के 15 हजार, बिहारीपुरा के 12 हजार, लालकुआं के नौ हजार और महेंद्र एन्क्लेव के करीब चार हजार लोग ओवरलोड झेल रहे हैं।
शिकायत के बाद भी नहीं हो रही सुनवाई
रात में बिजली जाने के बाद लोगों को छत, बालकनी और सड़कों पर टहलते हुए समय बिताना पड़ता है। विद्युत निगम में शिकायत के लिए फोन करते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती। कई बार रात 12 बजे बिजली जाने के बाद सुबह 3 से 4 बजे तक आपूर्ति बहाल होती है। सावरिया क्षेत्र के सबस्टेशन से नोएडा में आपूर्ति की जा रही है, लेकिन वहां दो नए सबस्टेशन बनने के बाद भी 11 केवी सबस्टेशनों पर भार न डालने से बार-बार ट्रिपिंग, तकनीकी खराबी और फॉल्ट की समस्या बनी रहती है। प्रभावित इलाकों में प्रतिदिन चार से पांच घंटे तक बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है।