ज़िंदगी हुई बेलीगारद

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belligard the story of the 1857 revolution hidden behind this lucknow word
लखनऊ और खासतौर से पुराने लखनऊ के लोग एक शब्द अक्सर बोलते हैं, ‘ बेलीगारद ’। ज्यादातर को इसके पीछे की कहानी नहीं पता। मुसीबत में घिरे होने पर लोग बोलते हैं, ‘जिंदगी बेलीगारद हो गई’। इस शब्द की उत्पत्ति 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी है। लखनऊ में एक ऐतिहासिक इमारत है ‘रेजीडेंसी’। नवाबों की बनवाई इस इमारत में शुरुआती दौर में रहने के लिए आए अंग्रेज कैप्टन जॉन बेली के सम्मान में नवाब सआदत अली खां ने विशेष ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया था। उसी समय रेजीडेंसी में एक गेट बना और नाम रखा गया ‘बेली गार्ड’। इसे लोग ‘बेलीगारद’ कहने लगे। जब 1857 का स्वतंत्रता संग्राम हुआ तो बेगम हजरतमहल के नेतृत्व में रेजीडेंसी पर आक्रमण कर दिया। इसी संघर्ष में इमारत तहस-नहस हो गई। तब लोगों ने बेलीगारद शब्द को जर्जर इमारत से जोड़ दिया। मुसीबत में घिरे होने पर लखनऊ वासी कहते- ‘जिंदगी बेलीगारद हो गई’ यानी उसी इमारत की तरह तबाह हो गई। एक बार जो यह शब्द चलन में आया, तो फिर जुबान पर चढ़ते देर न लगी।