Remove Illegal Encroachments From Eco sensitive Zone Or Face Action Strictness Around Sultanpur Bird Sanctuary
‘ईको सेंसिटिव ज़ोन से खुद हटा लें अवैध कब्ज़े, नहीं तो होगी कार्रवाई’
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT न्यूज, गुड़गांव
ईको सेंसिटिव जोन में हुए अवैध निर्माण ों पर सख्ती की जा रही है। सोमवार को सुल्तानपुर बर्ड सैंक्चुरी में हुई अधिकारियों की मीटिंग में अवैध निर्माण हटाने को लेकर योजना तैयार की गई। इस मीटिंग में डीटीपी एनफोर्समेंट आरएस बाठ सहित वन्य जीव और वन विभाग समेत पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी मौजूद रहे। मीटिंग के बाद अधिकारियों ने करीब 20 साइट विजिट की। अधिकारियों ने मौके पर निर्माणों की स्थिति का जायजा लिया और संबंधित संपत्ति मालिकों से कहा कि वह खुद से अवैध निर्माण हटा लें। इसके बाद नियम अनुसार कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण हटाए जाएंगे। बीते साल वन्य जीव विभाग की ओर से किए गए सर्वे में सामने आया कि प्रतिबंधित एरिया में एक तरह से अवैध कॉलोनी बसा दी गई है। मकान मालिकों ने मकान बनाकर किराए पर दिए हुए हैं। वन्य जीव अधिकारी आरके जांगड़ा ने बताया कि पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में जीरो टॉलरेंस की नीति से काम किया जाएगा। अवैध निर्माण हटाने को लेकर लोगों को समय दिया गया है।सोहना में कल होगी तोड़फोड़:
क्षेत्र के वन संरक्षित क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में आठ जुलाई को संरक्षित वन क्षेत्र में बुल्डोजर चलाया जाएगा। इस दौरान एक स्कूल, एक चर्च और एक अन्य अवैध इमारत को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। इस क्षेत्र में वन संरक्षण कानूनों के उल्लंघन और बिना अनुमति किए गए निर्माणों को चिह्नित किया गया है। विभाग का कहना है कि संरक्षित वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है और ऐसे मामलों में न्यायालय के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
उड़ती धूल और आसपास हुए निर्माण से परेशानी : पर्यावरण की बेहतरीन को लेकर पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में पांच किलोमीटर के दायरे में किसी प्रकार के निर्माण कार्य पर प्रतिबंध है। इसके बाद भी सुल्तानपुर बर्ड सेंक्चुरी के आसपास एरिया में अवैध निर्माण बढ़ गए हैं। अब अवैध निर्माण करने वालों पर सख्ती होगी। सेंक्चुरी के आसपास हो रहे अवैध निर्माण के चलते हो रहे शोर शराबे के कारण पक्षियों को यहां काफी दिक्कत होती है।
इसके अलावा निर्माण कार्य से उड़ती धूल भी पक्षियों की परेशानी का कारण बन सकती है। क्षेत्र में काफी संख्या में फार्म हाउस के अलावा पटाखों के गोदाम, होटल, ढाबे और बैंक्वेट हॉल बन गए हैं। इससे यहां पर वाहनों की आवाजाही भी बढ़ गई है।