जब मेसोपोटामिया में हुई क़र्ज़ माफ़ी

नवभारतटाइम्स.कॉम
ancient debt waivers in mesopotamia the secret to economic balance and social stability
अभिषेक मिश्र

आज भले कर्ज माफी असाधारण लगती हो, मगर प्राचीन सभ्यताओं में यह शासन व्यवस्था का हिस्सा थी। 3,000 से 1,000 ईसा पूर्व के बीच मेसोपोटामिया और इजिप्ट के शासकों ने समय-समय पर कर्ज माफ किया है। इसका मकसद आर्थिक संतुलन और उत्पादन क्षमता बरकरार रखने के साथ सामाजिक अस्थिरता को रोकना था।
हम्मूराबी की उदारता । मेसोपोटामिया में 1792 से 1750 ईसा पूर्व तक शासन करने वाले हम्मूराबी ने कर्ज माफी नीति लागू की थी। उनके 42 बरस के शासन में कम से कम चार बार कर्ज माफ किए गए। इसके तहत किसानों और आम लोगों के सरकारी व प्रभावशाली वर्गों से लिए गए ऋण खत्म कर दिए गए। यह प्रक्रिया महज आर्थिक राहत नहीं, प्रशासनिक हस्तक्षेप का संगठित रूप थी।

क्यों हुई कर्ज माफी ? तब अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित थी। किसानों को जमीन, पशु और सिंचाई जैसी सुविधाएं दी जाती थीं। लेकिन, फसल खराब होने, बाढ़-सुखाड़ की स्थिति में उन्हें कर्ज लेना पड़ता था। कर्ज नहीं चुकाने पर जमीन हाथ से चली जाती और परिवार वाले भी बंधुआ मजदूर बन जाते थे। इन्हीं खतरों को कम करने के लिए शासकों ने कर्ज माफी की घोषणाएं कीं।

सख्ती से पालन । मेसोपोटामिया में यह परंपरा हम्मूराबी के पहले भी थी। 2,400 ईसा पूर्व के आसपास सुमेर के लगश में इसके प्रमाण मिलते हैं। 1,400 ईसा पूर्व तक करीब 30 बार ऐसा किया गया। इन घोषणाओं को अमार्गी, मिशारुम और अंदुरारुम जैसे नामों से जाना जाता था। अगर कोई अधिकारी या साहूकार कर्ज नहीं चुकाने पर किसी किसान की संपत्ति पर कब्जा करता था, तो उसे वापस करने का आदेश दिया जाता था। उल्लंघन करने पर मृत्युदंड तक का प्रावधान था।

अंधकार युग । शासकों का जोर किसानों की उत्पादन क्षमता बनाए रखने पर था। सिंचाई व्यवस्था और कृषि ढांचे को बरकरार रखना इसलिए भी जरूरी थी, क्योंकि पूरी अर्थव्यवस्था इसी पर निर्भर थी। हालांकि, 1,400 ईसा पूर्व के बाद मेसोपोटामिया में कर्ज माफी के प्रमाण नहीं मिलते। इतिहासकार उस दौर को अंधकार युग बताते हैं। तब असमानता बढ़ी और बड़े जमींदारों का दबदबा बढ़ने लगा। फिर दासता में तेजी आई। नतीजतन, बड़ी संख्या में लोग पलायन करने लगे।

इजिप्ट में भी परंपरा । इजिप्ट में भी कर्ज माफी की परंपरा देखने को मिलती है। रोसेटा स्टोन के अभिलेख से पता चलता है कि 196 ईसा पूर्व में सर्वोच्च शासक टॉलेमी 5 ने जनता का ऋण माफ कर दिया था। रामसेस 3 और रामसेस 4 के शासनकाल के दौरान भी करों में छूट, कैदियों की रिहाई और निर्वासितों की वापसी जैसे कदम उठाए गए। इजिप्ट में भी कृषि उत्पादन बरकरार रखने के लिए ही कर्ज माफ किया जाता था। तब जरूरत पड़ने पर किसानों को सैनिक की भूमिका भी निभानी पड़ती थी। इसलिए, शासक नहीं चाहते थे कि किसान अत्यधिक कर्ज में डूबकर अपनी जमीन और आजादी खो दें।

सामाजिक जरूरत । भले ही आज ऋण चुकाना अनिवार्य हो गया है - सरकार, वित्तीय संस्थान और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां इसे आर्थिक अनुशासन का आधार मानती हैं, मगर इतिहास गवाह है कि परिस्थितियों के अनुसार कर्ज माफी भी शासन का हिस्सा रही है। प्राचीन उदाहरणों से यह पता चलता है कि जब कर्ज का बोझ असहनीय हो जाता है और समाज के बड़े हिस्से को प्रभावित करता है, तो उसे समाप्त करना केवल आर्थिक निर्णय नहीं, सामाजिक जरूरत भी बन जाता है।