रिज की हरियाली में ज़िंदा है अरावली

नवभारतटाइम्स.कॉम
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सरदार पटेल मार्ग की स्थायी हलचल छोड़कर सेंट्रल रिज क्षेत्र में प्रवेश करते ही शहर का शोर पीछे छूट जाता है। फिर साथ होता है पथरीला इलाका, कांटेदार झाड़ियां और हरियाली। दिल्ली की गर्मी और प्रदूषण के बीच रिज राहत का कोना है। राजधानी के फेफड़ों की तरह है यह, प्राचीन अरावली पहाड़ियों का जीवित बचा हुआ हिस्सा।

दिल्ली की दीवार । सेंट्रल रिज करीब 864 हेक्टेयर में फैला है। दिल्ली पर दाग है दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक होने का। यहां रिज काम करता है प्राकृतिक दीवार की तरह। यह कार्बन सोखती है और दिल्लीवासियों को ताजी हवा का झोंका देती है। यहां सबसे ज्यादा विलायती कीकर के लंबे पेड़ दिखते हैं। अब सरकार रिज की सूरत बदलने वाली है। विलायती कीकर और जहरीले बबूल के पेड़ों को हटाकर उनकी जगह पर्यावरण अनुकूल व ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन, जामुन जैसे पेड़ लगाए जाएंगे।
कीकर का जंगल । कीकर के इन पेड़ों को ब्रिटिश काल में रोपा गया था। इन्होंने रिज के बड़े हिस्से को ढक रखा है। ये सूखी और पथरीली जमीन में भी अच्छे से उगते हैं। जड़ें इनकी गहरी होती हैं और मिट्टी को मजबूती से पकड़ लेती हैं। वैसे यहां नीम, बबूल, पीपल, शीशम, जामुन और कुछ रुद्राक्ष के पेड़ भी हैं।

रिजर्व फॉरेस्ट । ब्रिटिश हुकूमत के दौरान गर्मी से बचने के लिए रिज में हजारों पेड़ लगाए गए थे। अब सरकार फिर से यहां पौधरोपण करने जा रही है। 1914 में इसे रिजर्व फॉरेस्ट घोषित कर दिया गया। हालांकि जब आबादी बढ़ती गई, तो इसके कुछ हिस्से भी शहर ने निगल लिए।

जानवरों से सामना । यहां घूमने के दौरान सबसे आनंददायक पल तब होते हैं, जब कोई जानवर दिख जाए। नीलगाय, खरगोश और गीदड़ों का घर है इस क्षेत्र में। पहले तो नीलगाय छोटे-छोटे झुंड में रहा करती थीं, अब उनकी संख्या कम हो गई है लेकिन फिर भी दिख जाती हैं। 100 से ज्यादा प्रजाति के पक्षियों ने भी डेरा डाला हुआ है इस हरियाली में। पेड़ों पर तोते सैकड़ों की संख्या में चहचहाते हैं। मानो, आपस में बातचीत कर रहे हों। आराम करते उल्लू भी दिख जाएंगे और फूलों पर मंडराती रंग-बिरंगी तितलियां भी। कीड़े, चमगादड़ और सांप भी यहीं रहते हैं। इन सबने जिंदा रखा हुआ है रिज को।

दिल का रिश्ता । सैर के दौरान बंदरों के झुंड से सामना तो जरूर ही होगा। न जाने कितनी पीढ़ियों से ये बसे हैं यहां। दिन में इनका झुंड सरदार पटेल मार्ग पर आ जाता है। वहां दिल्ली वाले इन्हें खाने को कुछ देते हैं। बहुत गहरा और आत्मीय है यह रिश्ता।