अगले एक साल बिजली उत्पादन नहीं, बढ़ती मांग पूरी करना चुनौती

नवभारतटाइम्स.कॉम
electricity crisis looms in haryana demand to rise due to el nio consumption is the challenge not production
n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव

आने वाले एक साल में हरियाणा के बिजली क्षेत्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिजली बनाना नहीं, बल्कि बढ़ती मांग के अनुरूप समय पर बिजली उपलब्ध कराना हो सकती है। इसकी बड़ी वजह एल नीनो को माना जा रहा है। इसके असर से प्रदेश में सामान्य से अधिक गर्मी और उमस रहने की आशंका है। इससे घरों, दफ्तरों, उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल बढ़ेगा, जिसके कारण बिजली की मांग में काफी वृद्धि हो सकती है।
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की नई रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 से जून 2027 के बीच केवल बढ़ती कूलिंग जरूरतों के कारण हरियाणा में करीब 10.9 करोड़ यूनिट (109 मिलियन यूनिट) अतिरिक्त बिजली की मांग पैदा हो सकती है। इसे पूरा करने के लिए लगभग 11.2 करोड़ यूनिट अतिरिक्त बिजली कोयला और अन्य जीवाश्म ईंधनों से पैदा करनी पड़ सकती है, जो खर्च के साथ ही प्रदूषण बढ़ने का भी कारण बन सकता है।

खपत बढ़ने से पैदा होगा बिजली संकट: रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार संकट बिजली उत्पादन घटने का नहीं बल्कि खपत बढ़ने का है। अध्ययन के अनुसार, एल नीनो का जल विद्युत और सौर ऊर्जा उत्पादन पर असर बेहद कम रहेगा। जलविद्युत और सौर उत्पादन में केवल 1 से 2 मिलियन यूनिट तक की मामूली कमी आने का अनुमान है, जबकि पवन ऊर्जा उत्पादन लगभग स्थिर रहने की संभावना है।

गर्मियों में रेकॉर्ड स्तर पर पहुंचती है मांग : हरियाणा में सामान्य दिनों में औसतन करीब 19 करोड़ यूनिट बिजली प्रतिदिन की खपत होती है। ऐसे में एल नीनो के कारण अनुमानित 10.9 करोड़ यूनिट अतिरिक्त मांग राज्य की लगभग आधे दिन की सामान्य बिजली खपत के बराबर है। गर्मियों में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचता है, तब बिजली की मांग पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर चली जाती है। मिनिस्ट्री ऑफ़ एनर्जी के आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार साल में बिजली की मांग बढ़ी है। साल 2022-23 में 61,451 मिलियन यूनिट की जरूरत के मुकाबले 60,945 मिलियन यूनिट बिजली दी ई गई। 2023-24 में मांग बढ़कर 63,983 मिलियन यूनिट पहुंची, जबकि सप्लाई 63,636 मिलियन यूनिट रही। 2024-25 में बिजली की जरूरत बढ़कर 70,149 मिलियन यूनिट हो गई।