फ़ुटबॉल मैदान पर शरीर और मन दोनों का तालमेल होना बेहद ज़रूरी

Contributed byडॉ. दीपक रानाडे|नवभारतटाइम्स.कॉम
football body mind coordination is the key to success
फीफा विश्व कप में फुटबॉल के मैदान पर ताकत, फुर्ती, नियंत्रण, धैर्य और सहनशक्ति का तालमेल देखने को मिल रहा है। यह तेज रफ्तार खेल शरीर जितना ही मस्तिष्क की मजबूती की भी मांग करता है। और यही लय जीवन की सफलता के लिए जरूरी है। स्ट्राइकर फुर्तीले और उच्च क्षमता वाले खिलाड़ी होते हैं। उन्हें केवल गेंद की दिशा का ही नहीं, विरोधी खिलाड़ियों की अगली चाल का भी सटीक अनुमान लगाना पड़ता है।

जब स्ट्राइकर विरोधी रक्षापंक्ति को चीरते हुए आगे बढ़ता है, तब उसे एक साथ दो काम करने होते हैं- गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखना और अपने साथियों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखना। सही समय पर स्वयं आगे बढ़ना या साथी खिलाड़ी को पास देना, यह निर्णय उसे पल भर में लेना होता है।
यह केवल शारीरिक कौशल नहीं, गहरी एकाग्रता, वर्तमान क्षण में पूरी तरह उपस्थित रहने की क्षमता और पूरे मैदान की मानसिक तस्वीर बनाए रखने की कला है। इस स्तर का प्रदर्शन केवल अभ्यास से संभव नहीं। इसके लिए एक प्रकार की आध्यात्मिक चेतना भी चाहिए। क्षण भर में सही निर्णय तभी लिया जा सकता है, जब मन पूरी तरह स्थिर हो। ऐसा वर्तमान, जहां न अतीत का बोझ हो, न भविष्य की चिंता, न जीत का अहंकार और न हार का भय।

मस्तिष्क और शरीर का बेहतर तालमेल तभी संभव है, जब मन पूरी तरह शांत और वर्तमान क्षण में केंद्रित हो। उस समय खिलाड़ी अपने से ऊपर उठ जाता है ताकि पूरे मैदान को एक साथ देख पाए। यही वह अवस्था है, जहां खिलाड़ी केवल इंसान नहीं रहता, वह अपनी प्रतिभा के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचकर किसी जीनियस की तरह खेलता है। जीवन में हर लक्ष्य को पाने के लिए एक फुटबॉल खिलाड़ी की तरह वर्तमान में जीने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना चाहिए। (लेखक न्यूरोसर्जन हैं)