इजिप्ट की ओर से की गई पेनल्टीअपीलों पर अर्जेंटीना जैसी जांच नहीं

नवभारतटाइम्स.कॉम
why no investigation on egypts penalty appeals like argentina questions raised on var
सवाल यह नहीं कि इजिप्ट के गोल को रद्द कर दिया गया, सवाल यह है कि इजिप्ट की ओर से की गई पेनल्टी अपीलों पर उसी स्तर की जांच क्यों नहीं हुई, जितनी अर्जेंटीना के अपील पर हुई। जिस मुकाबले में अर्जेंटीना ने 0-2 से पिछड़ने के बाद 3-2 से जीत दर्ज कर क्वॉर्टर फाइनल में जगह बनाई, उस मुकाबले को इतिहास अर्जेंटीना की जीत से ज्यादा कुछ विवादित फैसलों के लिए याद रखेगा।

सबसे बड़ा विवाद
इजिप्ट 2-0 की बढ़त के साथ विश्व कप की सबसे बड़े उलटफेर की कहानी लिखने के करीब था, लेकिन यहीं से मैच का सबसे विवादित अध्याय शुरू हुआ। जिको ने खेल के 59वें मिनट में गोल दागा, लेकिन VAR ने लगभग 21 सेकंड पहले और अर्जेंटीना के गोलपोस्ट से करीब 100 गज दूर हुए मारवान अत्तिया और लिसांद्रो मार्टिनेज के बीच संपर्क को फाउल मानते हुए जिको का गोल रद्द कर दिया। नियम इसकी अनुमति देते हैं, लेकिन सवाल फैसले से ज्यादा उसके इस्तेमाल पर है। क्या हर मैच में इतने पीछे जाकर हर अटैकिंग मूव की जांच होती है? आपके पास जवाब होगा, नहीं।

एक्स्ट्रा टाइम में एंजो फर्नांडेज ने विजयी गोल दागा, लेकिन इससे पहले इजिप्ट ने पेनल्टी की जोरदार अपील की। उनका आरोप था कि बॉक्स में हमदी फाथी की जर्सी खींची गई और इससे पहले मोहम्मद सालाह को भी फाउल कर रोका गया। इजिप्ट को उम्मीद थी कि VAR उसी गंभीरता से इस घटना की जांच करेगा, जैसी उसने उनके रद्द किए गए गोल के समय की थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही वह क्षण था, जिसने इजिप्ट के खिलाड़ियों, कोच और करोड़ों प्रशंसकों को यह महसूस कराया कि दोनों टीमों के लिए अलग-अलग पैमाने अपनाए गए।

मेसी के साथ हमदर्दी?

सुपरस्टार खिलाड़ियों और बड़ी टीमों को कथित तौर पर विशेष संरक्षण मिलने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं और इसके कुछ साक्ष्य इस टूर्नामेंट में भी नजर आए हैं। कुछ मैच पीछे जाएं तो एक और सवाल आपके सामने आएगा कि क्या अल्जीरिया के खिलाफ मैच में आइसा मांडी पर मेसी द्वारा किए गए खतरनाक टैकल की दोबारा समीक्षा हुई थी? इजिप्ट के खिलाफ ही मैदान पर अर्जेंटीना की ओर से कई ऐसे टैकल और फाउल नजर आए जिन्हें पहले सीधा फाउल माना जाता था, लेकिन खेल जारी रहने दिया गया। जब एक जैसी घटनाओं पर अलग-अलग निर्णय लिए जाते हैं, तब विवाद होते हैं और रेफरी की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आ जाती है।