खटाई चूहे खा गए

Contributed byक्षमा शर्मा|नवभारतटाइम्स.कॉम
bhagalpur scientists made butter from mango peels but grandmas khatayi was something else
हाल में एक खबर पर नजर पड़ी कि भागलपुर में वैज्ञानिकों ने आम के छिलके और गुठली से मक्खन व तेल तैयार किया है। हालांकि 'आम के आम और गुठलियों के दाम' वाली कहावत हमारे घरों में लोगों को हमेशा से पता रही है।

वे दिन बीते भी ज्यादा समय नहीं हुआ, जब गांवों में बोरा भरकर कच्चे आम लाए जाते। दादी, नानी या मां उनसे साल भर के लिए तरह-तरह के खट्टे-मीठे अचार, मुरब्बे बनातीं। छीलकर खटाई सुखाई जाती। आम पना के तो कहने ही क्या! पके आम खाकर उनकी गुठलियां धोकर चूल्हे में भूनी जातीं, फिर तोड़कर अंदर की गिरी खाई जाती। यह कसैली लगती, लेकिन इसके ऊपर पानी पिओ तो मीठा। गुठलियों के गूदे को नारियल तेल में जलाकर तेल तैयार किया जाता, जो बालों के लिए बहुत अच्छा माना जाता था। गुठली को रस्सी की चारपाई पर घिसकर छेद करते और उससे बाजा बजाते। जब छठी कक्षा में पढ़ती थी, तो पिता जी की फर्रुर्खाबाद रेलवे स्टेशन पर पोस्टिंग थी। साथ में चाचा जी की बेटी भी रहती। वह आठवीं में थी। वहां आम खूब होते। घर के दोनों ओर खूब खुली जगह। मां ने एक बार ढेर सारे देसी आम मंगाकर खटाई डाल दी। जब खटाई तैयार हुई, तो मां ने उन्हें तीन कनस्तरों में भरा और ऊपर की तरफ अलमारी में रख दिया। जहां ये कनस्तर रखे गए, वहां की ऊंचाई इतनी थी कि हम दोनों बहनें चारपाई पर चढ़कर पहुंच सकते थे।
अब मां और पिता जी तो दिन भर के काम से थक-हारकर सो जाते। हम बहनें पढ़ाई के नाम पर देर तक जगी रहतीं। उन दिनों डेलियों वाला नमक ही मिलता था। हम चुपके से नमक की डेलियां तकिए के नीचे रख लेते और फिर कनस्तर से मुट्ठी भर-भरकर खटाई निकालते। हमारी पढ़ाई तब तक चलती, जब तक नमक और खटाई खत्म नहीं हो जाती। एक दिन मां ने कहा कि पता नहीं डिब्बे में नमक इतना कम कैसे हो गया है। लगता है कि चूहे खींचकर ले जा रहे हैं। मां की बात सुनकर हम दोनों बहनें चुप लगा गईं।

लेकिन, कोई भी राज हमेशा छिपा नहीं रह सकता। मां ने एक दिन जब कनस्तर खोला, तो वह भी खाली निकला। तो क्या चूहे सारी खटाई भी खा गए? हमें लगा कि चोरी पकड़ी गई। उस समय तो मां ने कुछ नहीं कहा, लेकिन फिर एक दिन धमकाते हुए कहा - सच बताओ, खटाई तुम लोगों ने खाई है। मां के पूछने का तरीका कुछ ऐसा था कि हम झूठ नहीं बोल सके। मां ने अपने माथे पर हाथ मारा, 'अरे कम्बख्तो, इतनी खटाई खाकर मरना चाहती हो।' इसके बाद पूरे कुनबे में यह कहावत चल पड़ी कि तीन कनस्तर खटाई चूहे खा गए।