Changing Future Of Provident Fund More Salary In Hand Nps Option For Future
प्रॉविडेंट फंड का भविष्य
नवभारतटाइम्स.कॉम•
प्रॉविडेंट फंड का मकसद रिटायरमेंट के बाद चैन का जीवन देना है। एक समय एम्प्लॉयी इसके बदलावों पर गहरी नजर रखते थे। आज माना जाता है कि इसके कारण हाथ में आने वाली सैलरी कम हो जाती है। शायद इसलिए प्रॉविडेंट फंड के नियमों को लगातार बदला जा रहा है।
अभी तक ये नियम था कि नौकरी जॉइन करते समय 15,000 से कम बेसिक सैलरी वालों के लिए प्रॉविडेंट फंड जरूरी है। इससे ज्यादा बेसिक सैलरी हुई, तब मर्जी की बात थी। लेकिन एक बार इसे चुन लिया तो फिर आप अपनी भी नहीं सुन सकते थे। इसके बाद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की चलती है। इसका कायदा यह था कि जितनी भी बेसिक सैलरी है, उसका 12% एम्प्लॉयी देगा और इतना ही एम्प्लॉयर। इससे एकमुश्त फंड, पेंशन और बीमे की सुविधा मिलेगी। अब नियमों को लचीला बना दिया गया है। अब भले ही बेसिक 50 हजार रुपये हो, प्रॉविडेंट फंड के लिए 12-12% रकम सिर्फ 15,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर काटी जा सकती है। इसे यूं समझते हैं। अगर किसी की बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये है, तब एम्प्लॉयी का 6,000 रुपया और एम्प्लॉयर का 6,000 रुपया प्रॉविडेंट फंड में जमा होगा। अब 15,000 की बेसिक सैलरी पर दोनों की तरफ से योगदान सिर्फ 1,800-1,800 रुपये तक सीमित रखा जा सकता है। इससे सैलरी का ज्यादा बड़ा हिस्सा कर्मचारी के हाथ आएगा। वो आज मजे कर सकता है।अब सवाल है कि जिन्हें भविष्य की चिंता है, वो क्या करें? जिन्हें रिटायरमेंट प्लानिंग करनी है, उनके लिए नैशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS को विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है। NPS एक अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन याद रहे कि इसका रिटर्न बाजार के परफॉर्मेंस पर निर्भर है, जबकि प्रॉविडेंट फंड का रिटर्न सरकार की निगरानी में हर साल तय किया जाता है। साल 2000 में इसका रिटर्न करीब 12% हुआ करता था। कम होते-होते आज भी इसका रिटर्न 8.25% है, जिसे फिक्स्ड इनकम के मामले में बेहतरीन माना जा सकता है। पीएफ की चमक धीरे-धीरे छिन रही है। 2021 के बजट में तय किया गया कि इसमें एक साल में ₹2.5 लाख से अधिक की राशि जमा होने पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आ जाएगा। कर्मचारी भविष्य निधि की ऑनलाइन सेवाओं में बार-बार आने वाली दिक्कतों ने भी लोगों को निराश किया है। अक्सर वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद भी खातों में ब्याज की रकम दिखने में लंबा समय लग जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर पांच में एक क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। अब सभी अपना भविष्य तय करने के लिए आजाद हैं।