ऑस्ट्रेलिया से साझेदारी

नवभारतटाइम्स.कॉम
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10 जुलाई का संपादकीय ‘दोस्ती में नई ऊर्जा’ पढ़ा। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए विश्वसनीय, सुरक्षित और स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति बेहद जरूरी है। ऑस्ट्रेलिया ऐसे में भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बनकर उभर रहा है। दोनों देशों के संबंध अब पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़ रहे हैं। यूरेनियम और महत्वपूर्ण खनिजों के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल ऑस्ट्रेलिया, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। देश के नागरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में बढ़ता द्विपक्षीय सहयोग दोनों देशों के लिए हितकर साबित हो सकता है। इससे भारत को परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

बाल गोविंद, नोएडा
 समझौते में ईमानदारी

यह पत्र 9 जुलाई के संपादकीय 'बातचीत ही रास्ता' से संबंधित है। कहा जाता है कि जब तक संवाद कायम रहता है समाधान की गुंजाइश बनी रहती है। दुख का विषय है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम शांति समझौता एक महीने भी नहीं टिक सका, जिससे पश्चिम एशिया फिर तनाव और हिंसा की चपेट में आ गया है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता खतरा वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति, ऊर्जा कीमतों और वित्तीय बाजारों पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। युद्ध का विस्तार पूरी दुनिया के लिए आर्थिक और सुरक्षा संकट पैदा कर सकता है। ऐसे समय में संयम, कूटनीति और निरंतर संवाद ही सबसे प्रभावी विकल्प हैं। स्थायी शांति तभी संभव है, जब दोनों पक्ष समझौतों का ईमानदारी से पालन करें और बातचीत से समाधान का रास्ता खोजें।

अमृतलाल मारू, ईमेल से