Star Swallows Planet A Unique Game Of Gravity In The Universe
तारे की भूख
नवभारतटाइम्स.कॉम•
दिलीप लाल
ब्रह्मांड में कई ग्रहों का अंतिम हश्र एक दिन अपने ही तारे में समा जाना होता है। इस प्रक्रिया को प्लैनेटरी एंगल्फमेंट ( ग्रह निगलना ) कहा जाता है। पृथ्वी से करीब 1,300 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित TOI-5882 नामक तारे के पास वैज्ञानिकों ने ऐसी ही एक दुर्लभ घटना के प्रमाण खोजे हैं। उसमें लिथियम की असामान्य मात्रा मिली है। यह तत्व ग्रहों में अधिक और तारों में कम पाया जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किसी ऐसे ग्रह के अवशेष हैं, जिसे यह तारा पहले ही निगल चुका है। लेकिन एक सवाल - यह तारा अभी रेड जायंट नहीं बना है, फिर ग्रह उसके भीतर पहुंचा कैसे? जांच में पता चला कि तारे के बेहद करीब TOI-5882-b नाम का एक ब्राउन ड्वार्फ परिक्रमा कर रहा है। इसका द्रव्यमान बृहस्पति से लगभग 22 गुना अधिक है। द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इसी विशाल पिंड के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण ने पास के एक छोटे ग्रह को उसकी कक्षा से बाहर धकेल दिया। इसके बाद वह ग्रह तारे की ओर बढ़ा और उसमें समा गया। दिलचस्प बात यह है कि अब यही ब्राउन ड्वार्फ अपने अंत की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 2.5 से 3 करोड़ वर्षों में वह उसी का अगला ग्रास बन जाएगा। यह खोज बताती है कि ब्रह्मांड में गुरुत्वाकर्षण का खेल कभी-कभी शिकारी को भी शिकार बना देता है।