20 Years Wait For Flat Supreme Court Orders Freezing Of Builders Bank Accounts
36 महीने में मिलना था फ्लैट, बीत गए दो दशक
नवभारतटाइम्स.कॉम•
n NBT रिपोर्ट, नई दिल्ली : रियल एस्टेट कंपनी और उससे जुड़ी कंपनियों के बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश आने के बाद 20 साल से घर का इंतजार कर रहे खरीदारों को कुछ उम्मीद जगी है। मामला गुड़गांव सेक्टर-53 स्थित पार्श्वनाथ एक्सोटिका परियोजना से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने 2006 में अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर इसमें फ्लैट खरीदा था। दोनों वरिष्ठ नागरिक हैं। बिल्डर-बायर एग्रीमेंट 2007 में हुआ और 1.78 करोड़ रुपये की कीमत वाले फ्लैट का कब्जा 36 महीने के भीतर यानी फरवरी 2013 तक दिया जाना था। दो दशक बीतने के बावजूद न तो फ्लैट का निर्माण पूरा हुआ और न ही खरीदारों को कब्जा मिला। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (एचआरईआरए) का भी दरवाजा खटखटाया था। एचआरईआरए ने खरीदारों के पक्ष में मुआवजा देने का आदेश पारित किया, जिसे बिल्डर ने चुनौती भी नहीं दी। इसके बावजूद कंपनी ने न तो मुआवजा दिया और न ही फ्लैट का कब्जा सौंपा। अदालत ने कहा कि आदेशों के क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया निष्प्रभावी साबित हुई और खरीदार वर्षों तक न्याय के लिए भटकते रहे। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि डिवेलपर्स की ओर से अब तक कोई भी परियोजना समय पर पूरी नहीं की गई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि हरियाणा रेरा की ओर से जारी गैर-जमानती वॉरंटों का पालन क्यों नहीं कराया गया। अदालत ने हरियाणा के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, सभी जिला कलेक्टरों, पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और संबंधित बैंकों को निर्देश दिया कि वे अदालत के आदेशों का तत्काल पालन सुनिश्चित करें।