झूमर की चमक

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jhoomar not just decoration a symbol of culture and art
'झूमर' शब्द सुनते ही मन में छत से लटकने वाला सुंदर और आकर्षक जगमगाता दृश्य उभर आता है। अंग्रेजी में इसे Chandelier (शैंडेलियर) कहा जाता है। यह झूमर सौंदर्य और वैभव का प्रतीक माना जाता है। शाब्दिक अर्थ देखें तो 'झूमर' का संबंध किसी ऐसी वस्तु से है जो लटकती हो और हल्के-हल्के झूलती हुई दिखाई दे। शायद इसी कारण महिलाओं के कानों में पहने जाने वाले लटकनदार आभूषण को 'झुमका' या कई क्षेत्रों में 'झूमर' भी कहा जाता है। भारतीय लोकसंस्कृति में भी 'झूमर' का विशेष महत्व है। झारखंड सहित पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों में मांदल और अन्य लोकवाद्यों की ताल पर समूह में गाए और नाचे जाने वाले एक लोकप्रिय लोकनृत्य-गीत को 'झूमर' कहते हैं। नृत्य के दौरान कलाकार लय और ताल में झूमते हुए प्रस्तुति देते हैं, इसलिए इस नाम का संबंध 'झूमने' की क्रिया से जोड़ा जाता है। इस प्रकार 'झूमर' केवल एक सजावटी वस्तु का नाम नहीं, बल्कि आभूषण, लोककला और अभिव्यक्ति से जुड़ा शब्द है, जिसमें संस्कृति की विविधता और सौंदर्य झलकते हैं।