मेट्रो की रफ्तार पर यूटिलिटी का ब्रेक, कैसे तेज़ होगी शिफ्टिंग?

नवभारतटाइम्स.कॉम
slow pace of utility shifting in gurgaon metro break on construction work
n NBT रिपोर्ट, गुड़गांव

मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 (फर्स्ट फेज) तक प्रस्तावित गुड़गांव मेट्रो कॉरिडोर में यूटिलिटी शिफ्टिंग की सुस्त रफ्तार ने गुड़गांव मेट्रो रेल लिमिटेड ( GMRL ) की चिंता बढ़ा दी है। प्रॉजेक्ट को लेकर हो रही बैठकों में यह मुद्दा लगातार उठ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, जब तक वॉटर पाइपलाइन, गैस पाइपलाइन, बिजली की हाईटेंशन और लो टेंशन लाइनें व ऑप्टिकल फाइबर केबल जैसी यूटिलिटीज शिफ्ट नहीं होतीं, तब तक कई जगहों पर मेट्रो का सिविल वर्क पूरी रफ्तार से आगे नहीं बढ़ पाएगा।
इसी सिलसिले में कुछ दिन पहले नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अधिकारी की अध्यक्षता में GMRL और अन्य विभागों के साथ समन्वय बैठक भी हुई थी। हालांकि, बैठकों के बावजूद जमीनी स्तर पर अभी तक कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि यूटिलिटी शिफ्टिंग में देरी जारी रही, तो मेट्रो निर्माण के तय शेड्यूल पर असर पड़ना तय है।

अभी काफी कुछ शिफ्ट किया जाना बाकी: पहले चरण में मिलेनियम सिटी सेंटर से सुभाष चौक के बीच मेट्रो रूट पर आने वाले कुछ ट्रैफिक सिग्नल और CCTV कैमरे शिफ्ट किए जा चुके हैं, लेकिन अभी बड़ा हिस्सा बाकी है। सुभाष चौक के पास वॉटरलाइन, गैस पाइपलाइन और बिजली की कई लाइनों को हटाना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। GMRL की ओर से संबंधित विभागों के साथ लगातार बैठकें कर समन्वय बनाने की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।

कई एजेंसियों को मिलकर करना है काम : बताया जा रहा है कि मेट्रो प्रॉजेक्ट में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि GMDA, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड, IGL, GAIL, टेलीकॉम कंपनियों समेत कई एजेंसियों को मिलकर यूटिलिटी शिफ्टिंग का काम करना है। शुरुआती दौर में यह तय करने में समय लगा कि कहां कौन-सी यूटिलिटी प्रभावित होगी, उसे किस तरह शिफ्ट किया जाएगा, खर्च कौन उठाएगा और काम किस एजेंसी की निगरानी में होगा। अब जिम्मेदारियां और प्रक्रिया स्पष्ट होने के बाद भी शिफ्टिंग कार्य की गति नहीं बढ़ पा रही है।

यूटिलिटी शिफ्टिंग के बाद तेज़ होगा काम : अधिकारियों के अनुसार जब तक यूटिलिटी हटाकर जमीन क्लियर नहीं की जाती, तब तक निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा। ऐसे में गुड़गांव मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण में देरी की आशंका बढ़ती जा रही है।