मृत्युंजय राय
आर्टिफिशल इंटेलिजेंस पर OpenAI के सैम ऑल्टमैन और इलान मस्क की अदालती लड़ाई में टेस्ला के संस्थापक हार गए। पिछले कई वर्षों से AI के खतरों और फायदों को लेकर बहस चल रही है। इसके रेग्युलेशन का मुद्दा भी जोर जोर से उठ रहा है। लेकिन, इस बारे में राय क्या सुनी-सुनाई बातों पर बनानी चाहिए या इस बहस के बारे में बेहतर समझ किस तरह से बनाई जाए, ' AI for Good ' नाम की किताब में लेखक Josh Tyrangiel ने इसी का जवाब दिया है। उनका कहना है कि AI के अच्छे या बुरे होने की बहस में न पड़ा जाए। इस पर राय बनाने के लिए यह देखना चाहिए कि असल जिंदगी में यह इंसानों की किस तरह से मदद करता है?
जिंदगी पर असर । AI के इस पहलू को समझाने के लिए वह स्कूल, हॉस्पिटल, सरकारी एजेंसियों और रिसर्च लैबों में पहुंचते हैं। वह दिखाते हैं कि साधारण लोग किस तरह से इस टेक्नॉलजी का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसकी मदद से समस्याओं को सुलझा रहे हैं। किताब में बताया गया है कि डॉक्टर डायग्नोसिस में सुधार लाने, शिक्षक अपने स्टूडेंट्स को पढ़ाने, किसान फसल पर बेहतर मार्जिन के लिए और सरकारी संस्थाएं सीमित संसाधनों में अधिक से अधिक काम करने के लिए AI टेक्नॉलजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए जॉश की यह किताब रीडर्स को किसी टेक्निकल विषय के बारे में लिखी गई नहीं लगती, बल्कि उन्हें सार्थक चर्चा का अहसास दिलाती है। AI इंप्रेसिव है या नहीं, इस सवाल में उलझने के बजाय जॉश इस पहलू पर गौर करते हैं कि यह फायदेमंद, पूर्वाग्रह रहित और जवाबदेह है या नहीं।
पूर्वाग्रहों पर बात । जॉश AI पर संतुलित सोच को लेकर आगे बढ़े हैं। वह न ही इसे जादू की छड़ी मानते हैं और ना ही खतरनाक बताते हैं। उन्होंने किताब में इस टेक्नॉलजी को लेकर जो सवाल हैं, उनका जवाब दिया है। मसलन- इसके पूर्वाग्रहों के बारे में बात करते हैं। गलत सूचनाएं देने, निजता, डीपफेक और रोजगार पर इसके असर की चर्चा है।
केस स्टडी की मदद । यह किताब ट्रैवलॉग स्टाइल में लिखी गई है, इसलिए पढ़ने के दौरान रोचक बनी रहती है। फिर विषय को अच्छी तरह समझाया जा सके, इसके लिए इसमें अलग-अलग केस स्टडी का प्रयोग किया गया है। जॉश को तकनीकी विश्लेषण में नहीं उलझना पड़ता और रीडर्स का ध्यान केस स्टडी की वजह से अलग-अलग पहलुओं पर बना रहता है। हालांकि, अगर किसी को AI पॉलिसी, रेग्युलेशन और इसके इकॉनमिक्स के बारे में गहराई से जानना हो तो उसे थोड़ी निराशा हो सकती है।
जनता के लिए AI । जॉश लिखते हैं कि AI पर सिलिकॉन वैली के दिग्गजों या टेक्नॉलजी की दुनिया के महारथियों का नियंत्रण नहीं होना चाहिए। इसका इस्तेमाल साधारण वर्कर्स, कम्युनिटी लीडर्स, शिक्षाविदों और नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन को व्यापक तरीके से करना चाहिए। अगर मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर रोजमर्रा की जिंदगी में इसका इस्तेमाल किया जाएगा तो लोगों का भला होगा।
टेक्नॉलजी न्यूट्रल नहीं । जो AI के सामाजिक कामों में इस्तेमाल की समझ बनाना चाहते हैं, उन्हें इस किताब से मदद मिलेगी। यह किताब मशीनों के बारे में उतनी नहीं, जितनी तकनीक की मदद से लोगों को अपने काम को बेहतर ढंग से करने, सामाजिक सेवा और सामने आने वाली समस्याओं को तेजी से सुलझाने के बारे में। किताब इस बात पर भी जोर देती है कि प्रैक्टिस में कोई टेक्नॉलजी कभी न्यूट्रल नहीं होती। इससे आप क्या हासिल करते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन इसका इस्तेमाल कर रहा है।



