एक और एग्जाम, एक और खामी - नैशनल टेस्टिंग एजेंसी ( NTA ) के साथ यह कहानी बार-बार दोहराई जा रही है। CUET-UG में जिस तरह की अव्यवस्था देखने को मिली, वह हताश करने वाली है। सबसे ज्यादा निराशाजनक बात यह है कि एजेंसी अपने वादों पर खरी नहीं उतर पा रही और इससे उबरने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा।
फिर से एग्जाम । देशभर के विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए होने वाली CUET-UG में तकनीकी दिक्कतों की वजह से स्टूडेंट्स और उनके पैरंट्स घंटों परेशान रहे। कई जगह परीक्षा देरी से शुरू हुई और कई जगह हो ही नहीं पाई। NTA ने 3765 स्टूडेंट्स के लिए दोबारा एग्जाम कराने की बात कही है। एजेंसी का गड़बड़ियों को स्वीकार करना ठीक है, लेकिन असली सवाल है कि ऐसा बार-बार क्यों हो रहा है।
सुप्रीम टिप्पणी । पहले मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट रद्द करना पड़ा, क्योंकि पेपर लीक हो गए थे। इसके बाद CBSE के ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर विवाद उठा। ये दोनों मामले अभी तक हल नहीं हुए थे और CUET-UG का मसला खड़ा हो गया। इससे एक दिन पहले, 29 मई को ही NEET-UG मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी और उसमें अदालत ने जो टिप्पणियां कीं, उन पर अमल करने की जरूरत है।
बचाव के उपाय । NTA की तरफ से उठाए गए ज्यादातर कदम सुधारात्मक होते हैं, जिन पर ध्यान गड़बड़ी होने के बाद जाता है, जबकि जरूरत है पहले से बचाव के उपाय अपनाने की। इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए और जो जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा सकते, उन पर कार्रवाई हो।
स्टूडेंट्स पर दबाव । परीक्षा दोबारा करा देना, रीशेड्यूलिंग या ग्रेस मार्क वगैरह कभी-कभार तो ठीक हैं, लेकिन ये आदत नहीं बन सकते। किसी परीक्षा के लिए एक स्टूडेंट सालभर तैयारी करता है। जितना दबाव उस पर होता है, उतना ही उसके पैरंट्स पर भी।
एक और मौका । NTA को बनाया गया था ताकि देश की प्रमुख परीक्षाएं व्यवस्थित ढंग से कराई जा सकें। अभी तक एजेंसी इसमें सफल नहीं हो पाई है। आरोप है कि स्टूडेंट्स की परेशानियों को ठीक से नहीं समझा जाता, खासकर सेंटर अलॉटमेंट में। केवल किसी तरह एग्जाम करा देने से NTA का काम पूरा नहीं हो जाता। इससे लाखों बच्चों का भविष्य जुड़ा है, तो संवेदनशीलता भी जरूरी है। 21 जून को NEET-UG दोबारा होनी है और एजेंसी का दावा है कि इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उम्मीद है यह काम कर जाए, क्योंकि छात्रों के भरोसे का बार-बार टूटना अच्छा नहीं है।



