अलग दुनिया का रास्ता है दीवार पर टंगी पेंटिंग

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दीवार पर टंगी पेंटिंग एक अलग दुनिया का रास्ता दिखाती है। यह कलाकार के अनुभव और भावना को समेटे होती है। 67 हजार साल पहले आदिमानवों ने भी गुफाओं की दीवारों को सजाया था। पेंटिंग इंसान को रचयिता बनने का मौका देती है। यह फ्रेम में बंधे होने के बाद भी आजादी का अहसास कराती है।

painting on the wall a magical window to another world

फ्रेंच शब्द meules के कई अर्थों में से एक है भूसे का ढेर। इसके जो बाकी मायने हैं, वो भी शायद कुछ खास न लगें, मसलन - पीसने वाली चक्की, धार देने वाला पत्थर। लेकिन, फ्रांस के कलाकार Claude Monet ने इसी नाम से 1890 में जो सीरीज बनाई, उसकी एक पेंटिंग 2019 में 11.7 करोड़ डॉलर में नीलाम हुई। आज के हिसाब से यह रकम 11 सौ करोड़ रुपये से भी ज्यादा बनती है। Monet ने अलग-अलग मौसम, रोशनी और समय में भूसे के ढेर को कैनवस पर उतारा। उनका कमाल था कि जब काम पूरा हुआ, तो कागज पर रंगों ने बस भूसे को नहीं, सूरज की रोशनी और हवा की नमी को भी कैद कर लिया। आज जब उनकी पेंटिंग्स लोग देखते हैं, तो उन्हें वहां दिखती है सवा सौ साल पुरानी धूप, शाम, सुबह की ताजगी और मिट्टी।

Monet शुमार होते हैं महान कलाकारों में। उनकी उस पेंटिंग को सामने से देखना हर किसी की किस्मत में नहीं, और उसे दीवार पर सजाना तो बिल्कुल भी नहीं। लेकिन, बाकी आम घरों की दीवारों को सजाने वाली पेंटिंग्स भी बस एक तस्वीर न होकर कलाकार का अनुभव होती हैं। पहाड़, जंगल, नदी या कुछ भी जो उसने बनाया, उसमें उस क्षण की भावना को भी समेटने की कोशिश करता है कलाकार। और पेंटिंग को देखने का आनंद इसी में है कि हम उस भावना से जुड़ें। जो दिख रहा है, वह हमारे भीतर क्या जगाता है, यही है उसका जादू।

हर पेंटिंग एक कहानी है। एक अलग दुनिया होती है उसकी। और जब वही पेंटिंग किसी दीवार पर टंगती है, तो अपनी दुनिया को उस घर की दुनिया से मिला देती है। उस दीवार का कद अपने भाई-बंधुओं की तुलना में एकदम से बढ़ जाता है तब। पेंटिंग की शक्ल में उसके पास एक जादुई झरोखा जो होता है, जिसमें रंगों की नदियां बहती हैं। कभी न कभी हर किसी के मन में चाह जरूर उठती है कि वह इस नदी में उतरे, दीवार पर लगी पेंटिंग का हिस्सा बने। आज के इंसानों को यह आदत अपने पुरखों से ही तो लगी! 67 हजार साल पहले आदिमानवों ने घर बनाना नहीं सीखा था, पर यह सीख लिया था कि जिन गुफाओं में रहना है, उसकी दीवारों को कैसे सजाना है। इंडोनेशिया के मूना में अब तक की सबसे पुरानी गुफा पेंटिंग मिली है, हथेली की छाप, लाल रंग की।

और तब से इंसान जो भी देख रहा है, कोशिश कर रहा है उसे बनाने की। पेंटिंग ने उसे मौका दे दिया है रचयिता बनने का। इसमें वह हकीकत में अपनी कल्पना जोड़ सकता है, नियमों को तोड़ सकता है। फ्रेम में बंधे होने के बाद भी क्या है आजादी, यह बताती है दीवार पर टंगी पेंटिंग।