n सोनिया, गुड़गांव
शहर में उच्च शिक्षा के विकल्प बढ़ाने के उद्देश्य से खोले गए नए सरकारी कॉलेज अभी भी छात्रों की पहली पसंद नहीं बन पाए हैं। दाखिला प्रक्रिया शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन इन कॉलेजों में आवेदन संख्या उम्मीद से काफी कम है। पिछले साल भी इन कॉलेजों की करीब आधी सीटें खाली रह गई थीं। कॉलेज प्रशासन को इस बार भी छात्रों को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रवेश अभियान चलाने की तैयारी करनी पड़ सकती है।
कुछ कॉलेजों में अब तक 10 प्रतिशत सीटों पर ही आवेदन आ पाए हैं। शहर के रिठोज स्थित गवर्नमेंट कॉलेज में अब तक करीब 50 आवेदन ही आए हैं। वहीं सुल्तानपुर में 400 और मानेसर स्थित गवर्नमेंट कॉलेज में करीब 350 आवेदन आए हैं। इनमें से काफी कम आवेदन ऐसे हैं, जिनमें इन कॉलेजों को प्राथमिकता दी गई है। पिछले साल नए कॉलेजों की स्थिति संतोषजनक नहीं रही थी। कई संस्थानों में लगभग 50 प्रतिशत सीटें खाली रह गई थीं। इसके बाद कॉलेज प्राध्यापकों ने स्कूलों में जाकर जागरूकता अभियान चलाया था और छात्रों को कॉलेजों में उपलब्ध सुविधाओं व कोर्स और सीट संबंधी जानकारी दी थी। इसके बावजूद सीटें नहीं भर पाई थीं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छात्र अभी भी पुराने कॉलेजों को प्राथमिकता देते हैं। नए कॉलेजों में बुनियादी सुविधा, परिवहन सुविधा, कोर्स विकल्पों और कैंपस गतिविधियों की कमी को लेकर छात्र इनमें दाखिला नहीं लेते हैं। आवश्यकता पड़ी तो स्कूलों और आसपास के क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर नए कॉलेजों में उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं और कोर्सों की जानकारी दी जाएगी।
बिल्डिंग न होना बढ़ा रहा परेशानी: शहर के नए कॉलेजों के पास अपनी बिल्डिंग नहीं होना भी दाखिला संख्या पर प्रभाव डाल रहा है। दो कॉलेजों को तो अपनी बिल्डिंग मिल गई है, लेकिन बाकी तीन कॉलेजों की बिल्डिंग अभी तक तैयार नहीं हो पाई है। किसी में कोर्स नहीं है, तो किसी कॉलेज में पूरा स्टाफ तक नहीं है।

