क्रूड नरम, पेट्रोल-डीज़ल सस्ते होंगे?

Contributed byAkhilesh.Singh1,नई दिल्ली|नवभारतटाइम्स.कॉम

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम गिरे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच सुलह की उम्मीद से यह गिरावट आई है। इससे पेट्रोल और डीज़ल के दाम कम होने की संभावना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तेल उत्पादन बढ़ने में समय लगेगा।

क्रूड नरम, पेट्रोल-डीज़ल सस्ते होंगे?

नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान में सुलह की गुंजाइश बनने के बाद सोमवार को कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय भाव 5% से ज्यादा गिर गया और 82 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया। यह इस मायने में अहम है कि फरवरी में 70 डॉलर के आसपास रहने वाला ब्रेंट क्रूड युद्ध शुरू होने के बाद 122 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चला गया था।

सरकारी तेल कंपनियों के लिए क्रूड खरीद की ऐवरेज इंडियन बास्केट प्राइस फरवरी में करीब 69 डॉलर/बैरल थी। मार्च में यह 117.09 डॉलर/बैरल और अप्रैल में 114.48 डॉलर थी। मई में यह 106.23 डॉलर/बैरल रही। जून में फिलहाल 94.7 डॉलर/बैरल पर है।

राहत कब तक? : होर्मुज स्ट्रेट का खुलना इसलिए अहम है कि वहां से हमारे कुल क्रूड इंपोर्ट का करीब 40% हिस्सा आता रहा है। तेल एवं गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, 'अगर वहां मसला हल हो जाता है, तो सभी के लिए अच्छा है। सप्लाई में सुधार होगा।' वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'शांति होने पर भी पश्चिम एशिया में तेल-गैस का उत्पादन बढ़ाने में कम से कम 6 महीने लग सकते हैं। कच्चे तेल में हो सकता है कि उछाल न आए, लेकिन अनुमान यही है कि कीमत 80-90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहेगी।'

महंगाई घटेगी? : रिटेल और होलसेल इंफ्लेशन युद्ध के पहले से बढ़ रही थीं। मई में रिटेल इंफ्लेशन 3.93% हो गई। होलसेल इंफ्लेशन बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई। सबनवीस ने कहा, 'क्रूड का 80-90 डॉलर/बैरल का भाव पिछले साल से अब भी ज्यादा है। लिहाजा महंगाई ऊंची बनी रहेगी। साथ ही, जिन उत्पादकों ने ऑयल-बेस्ड प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा दिए हैं, वे अब इसे शायद ही घटाएं। अल-निनो इफेक्ट भी महंगाई पर दिखेगा।'

रेकमेंडेड खबरें