n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिना उपभोक्ताओं को सुने नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) पर बकाया उपभोक्ताओं की रकम को पुनरीक्षित करने के नियामक आयोग के आदेश पर आपत्ति जताई है। परिषद ने कहा कि जब टैरिफ निर्धारण प्रक्रिया में उपभोक्ता सुनवाई का हिस्सा थे तो उसी टैरिफ आदेश को पुनरीक्षित करते वक्त उन्हें क्यों नहीं सुना गया? अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के बाद नियामक आयोग ने एनपीसीएल का पांच साल का टैरिफ पुनरीक्षित कर दिया। इसके मुताबिक नोएडा पावर कंपनी पर उपभोक्ताओं की बकाया राशि में से 907 करोड़ रुपये समायोजित कर दिए गए हैं।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इस फैसले का उपभोक्ताओं पर विपरीत असर पड़ेगा। अभी तक इसी बकाया रकम को समायोजित करने के लिए ही एनपीसीएल उपभोक्ताओं को बिजली बिल में चार साल से 10 प्रतिशत की रियायत देती थी। यही नहीं, इसका असर अन्य बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का बकाया निर्धारित करने पर भी आएगा। उनपर तकरीबन 51 हजार करोड़ रुपये बकाया है।
उपभोक्ता हित में राज्य सरकार जाए सुप्रीम कोर्ट : राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इस पुनरीक्षण आदेश से न केवल ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के ढाई लाख उपभोक्ता प्रभावित होंगे बल्कि इसका असर पूरे प्रदेश के 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं पर आएगा। राज्य सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए।

