n NBT न्यूज, नोएडा
‘मुझे रख दिया छांव में, खुद जलते रहे धूप में..." पिता के त्याग और समर्पण को बयान करने वाली ये पंक्तियां हाल ही में सामने आए दो मामलों में पूरी तरह सच साबित हुईं। बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए दो पिताओं ने अपनी किडनी दान कर वह कर दिखाया, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। नोएडा के फोर्टिस हॉस्पिटल में हुए इन दोनों सफल किडनी ट्रांसप्लांट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पिता अपने बच्चों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा की डायरेक्टर नेफ्रोलॉजी डॉ. अनुजा पोरवाल के अनुसार, उपयुक्त मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट सबसे प्रभावी उपचार है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इन मामलों को आधुनिक चिकित्सा और पारिवारिक समर्पण का प्रेरणादायक उदाहरण बताया है। इन दोनों कहानियों ने यह साबित कर दिया कि पिता केवल जन्म ही नहीं देते, जरूरत पड़ने पर अपनी जिंदगी का हिस्सा देकर भी बच्चों को नया जीवन दे सकते हैं।
पहला मामला हरियाणा के हिसार निवासी 34 वर्षीय राहुल का है। राहुल एंड स्टेज किडनी डिजीज से जूझ रहे थे और पिछले छह महीनों से डायलिसिस पर थे। लगातार कमजोरी, भूख न लगना, तेजी से वजन घटना और सामान्य कामकाज में असमर्थता ने उनकी जिंदगी को बेहद कठिन बना दिया था। सप्ताह में तीन बार डायलिसिस और खानपान पर सख्त प्रतिबंधों के कारण उनका जीवन लगभग अस्पतालों तक सिमट गया था। फोर्टिस हॉस्पिटल में जांच के बाद विशेषज्ञों ने किडनी ट्रांसप्लांट को सबसे बेहतर विकल्प बताया। राहुल की मां स्वास्थ्य कारणों से डोनर नहीं बन सकीं। ऐसे में उनके पिता ने बिना हिचकिचाहट किडनी दान करने का फैसला लिया। सफल प्रत्यारोपण के बाद राहुल की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है और वह सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।


