n NBT न्यूज, ग्रेटर नोएडा
कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में नियमितीकरण की मांग को लेकर आउटसोर्स कर्मचारियों का धरना शनिवार को छठवें दिन भी जारी रहा। संस्थान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, जहां एक ओर कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन और पुलिस बल हड़ताल समाप्त कराने के लिए लगातार दबाव बना रहा है। शनिवार सुबह से ही एडीएम प्रशासन मंगलेश दुबे, एसडीएम आशुतोष गुप्ता और भारी पुलिस बल आंदोलनकारी कर्मचारियों को समझाने में जुटा रहा, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 10 से 13 वर्षों से संस्थान को अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थाई करने के बजाय अब नई भर्ती निकालकर उनके रोजगार पर संकट पैदा किया जा रहा है। हाउसकीपिंग स्टाफ ने आरोप लगाया कि उन्हें महज 10 से 11 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है। कर्मचारियों ने जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह से भी शिकायत की, लेकिन उनका कहना है कि केवल आश्वासन मिला, मदद नहीं। सुरक्षा के मद्देनजर संस्थान के मुख्य गेट की एक साइड को बंद कर दिया गया है।
मरीजों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए शनिवार को भारी पुलिस बल और पीएसी की निगरानी में ओपीडी सेवा शुरू की गई। कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए जिम्स के मेडिकल छात्रों का सहयोग लिया गया, जिन्हें पंजीकरण और पर्ची बनाने जैसे कार्यों में लगाया गया। साथ ही अन्य अस्पतालों से भी कुछ स्टाफ बुलाया गया। पूरे दिन पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अमला डटा रहा। निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि शनिवार को पुलिस सुरक्षा के बीच ओपीडी संचालित की गई, जिसमें करीब 250 मरीजों को चिकित्सा परामर्श दिया गया। मरीजों के हित में ओपीडी सेवा आगे भी जारी रहेगी। सोमवार तक स्टाफ अगर सहमति से हड़ताल खत्म नहीं करते है, तो वे बाहर से स्टाफ बुलाकर स्वास्थ्य सुविधाओं को बहाल कराएंगे। शनिवार को भी 600 से 700 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। ओपीडी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन हुए है। हालांकि सर्जरी कराने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ा।


