बिल्डिंग के फेर में फंसा जैन शोध संस्थान का 4 साल का UG कोर्स

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jain research institutes 4 year ug course stuck in building dispute uncertain to start
nNBT न्यूज, लखनऊ

गोमतीनगर स्थित जैन शोध संस्थान के नए रोजगारपरक कोर्स बिल्डिंग और संसाधनों के फेर में फंस गए हैं। संस्थान द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार किया गया जैन दर्शन और प्राकृत भाषा का नया 4 वर्षीय स्नातक (बीए) कोर्स बोर्ड ऑफ स्टडीज से पास होने के बावजूद इस सत्र में शुरू होता नहीं दिख रहा है।
 वर्तमान में बौद्ध और जैन शोध संस्थान एक ही बिल्डिंग में संचालित हैं। जहां बौद्ध शोध संस्थान की मुख्य बिल्डिंग के भीतर ही जैन शोध संस्थान का दफ्तर खुला है। जैन संस्थान का दावा है कि यह जमीन मूल रूप से उन्हीं के लिए आवंटित हुई थी, लेकिन बाद में संस्कृति विभाग ने यहां बौद्ध शोध संस्थान का निर्माण करवा दिया। हालांकि, बौद्ध शोध संस्थान इस दावे को सिरे से खारिज कर रहा है। जैन शोध संस्थान के पूर्व निदेशक अभय जैन का कहना है कि उनकी योजना बौद्ध संस्थान के परिसर में ही एक कमरा लेकर ऑनलाइन मोड में 30 सीटों वाला कोर्स शुरू करने की थी। विश्वविद्यालय में स्थायी कुलपति आते ही कार्यपरिषद से इसे पारित करवा कर अगले सत्र से इसे पूरी तरह क्रियान्वित करने की संभावना है। ललितपुर के बानपुर में भी एक संस्था के साथ MoU करके अगले सत्र से इसे वहां भी शुरू करने जा रहे हैं।  वहीं, बौद्ध शोध संस्थान के निदेशक राकेश सिंह ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि बिल्डिंग पूरी तरह से बौद्ध संस्थान की है और यह सरकारी संपत्ति है। रही बात कमरा देने या कोर्स संचालित करने की, तो यह हमारे हाथ में नहीं है।