हमारी जंग जारी रहे

नवभारतटाइम्स.कॉम

आज की दुनिया में भारत की मजबूती उसकी आत्मनिर्भरता में है। ऊर्जा, डिजिटल ढांचा और वित्तीय व्यवस्था में स्वदेशी विकल्पों को अपनाना जरूरी है। पेट्रोल-डीजल और गैस पर निर्भरता कम कर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहिए। विदेशी स्वामित्व वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म के बजाय स्वदेशी प्लेटफॉर्म विकसित करने होंगे।

self reliance is indias true strength move towards energy digital and economic independence

ये दुनिया कभी नियम-आधारित व्यवस्था पर चलती थी, आज जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली बात है। इन हालात में भारत को एक ही बात मजबूती दे सकती है, वो है इसकी आत्मनिर्भरता। बहुत सारे लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं। जहां थोड़ी असुविधा दिखती है, हम आत्मनिर्भरता के विकल्पों पर सवाल उठाने लगते हैं। अब हम विकल्प चुनने की स्थिति में नहीं हैं, बल्कि यह अस्तित्व का आवश्यकता है।

आज की दुनिया में तेल-गैस जैसी ऊर्जा ब्लैकमेलिंग की करंसी बन रही है। मोबिलिटी और खाना पकाने के लिए इलेक्ट्रिक विकल्पों को चुनने की हमारी गति बेहद धीमी है। प्रत्येक पेट्रोल और डीजल इंजन और गैस सिलिंडर उन ताकतों को ऊर्जा दे रहा है, जो विदेशी ऊर्जा बाजारों में उलटफेर कर रहे हैं। हमें इसका जवाब देना चाहिए। यह हो सकता है, सौर-ऊर्जा से जुड़े इलेक्ट्रिक ग्रिड की ओर तेजी से बढ़कर। बिजली उत्पादन के जरिये भारत अपने आयात बिल में हो रहे भारी नुकसान को रोक सकता है। आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी है कि राष्ट्रीय हितों को पूरी सख्ती से प्राथमिकता दी जाए, भले ही उपभोक्ता की सुविधा में थोड़ी कमी करनी पड़े।

आईटी महाशक्ति होने के बावजूद, भारत का डिजिटल ढांचा देखिए। सोशल मीडिया का इकोसिस्टम विदेशी स्वामित्व वाला है। यहां तक कि ईमेल जैसे संचार के लिए हम विदेशी प्लैटफॉर्म को पहली पसंद बनाते हैं। अगर पड़ोसी देशों में हाल के घटनाक्रमों से देखा जाए तो यह गंभीर सुरक्षा जोखिम हो सकता है। एक सच्चे संप्रभु भारत के पास स्वदेशी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म होना ही चाहिए। सुरक्षित ईमेल व्यवस्था समेत संपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करना होगा। इसके लिए हम अपने बेस्ट ब्रेन को बाहर जाने से रोकें। भारत में फिजिकल गोल्ड के प्रति सांस्कृतिक जुनून एक निष्क्रिय असेट को बढ़ावा दे रहा है। अरबों डॉलर का आयातित गोल्ड तिजोरियों में बंद हैं। इसका प्रत्येक ग्राम राष्ट्रीय खजाने पर सीधा बोझ है। यही पैसा आज बिजनेस और इनोवेशन पर खर्च हो तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को उत्पादक पूंजी मिलेगी। आजकल इनोवेशन का मतलब सर्विस ऐप रह गया है, जिसमें आप प्रॉडक्ट को ऑनलाइन बुक कर 10 मिनट में हासिल कर सकते हैं। उद्योग जगत के हमारे लीडर्स पूंजी को हाई लेवल R&D (अनुसंधान और विकास) की ओर नहीं मोड़ते। वैसे हम रक्षा मामलों में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहे हैं। UPI जैसे पेमेंट सिस्टम को पूरी दुनिया तक पहुंचाकर भी दबदबा बना सकते हैं। हमें जल्द से जल्द वो इनोवेशन चाहिए, जिसमें रेयर अर्थ मिनरल्स का भी तोड़ खोज लें।