फिर से मोहलत

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को मोहलत दी है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर 6 अप्रैल तक एनर्जी इंफ्रा पर हमला नहीं होगा। यह समय युद्ध विराम की बातचीत के लिए है। अमेरिका ने शांति का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन बयानों में बदलाव और हमलों से इसकी ईमानदारी पर सवाल है। इस मोहलत से बाज़ार में उम्मीद नहीं जगी है।

trumps new deadline for iran hope for ceasefire or waiting for serious consequences

ईरान को समझौता करने या गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी देने वाले डॉनल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर डेडलाइन फिर बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अब वह तेहरान के एनर्जी इंफ्रा को 6 अप्रैल तक निशाना नहीं बनाएंगे। 10 दिनों के इस वक्त का इस्तेमाल युद्ध विराम की बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता है, बशर्ते इसमें गंभीरता बरती जाए।

प्रस्ताव कितना ईमानदार । अमेरिका ने 15 सूत्रीय प्रस्ताव भेजकर यह संकेत दिया कि वह शांति कायम करना चाहता है। लेकिन, बार-बार बदल रहे बयानों और ईरान पर लगातार हो रहे हमलों की वजह से इस प्रस्ताव की ईमानदारी सवालों में है। फिर, जिस तरह की शर्तें थोपने की कोशिश है, उससे बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। युद्ध शुरू होने के पहले इन्हीं बिंदुओं पर गतिरोध था और वार्ता की मेज पर तब के मुकाबले आज ईरान ज्यादा मजबूत स्थिति में है।

मार्केट निराश । ट्रंप की दी इस नई मोहलत ने मार्केट में कोई खास उम्मीद नहीं जगाई। जिस दिन उन्होंने नया ऐलान किया, उसी दिन अमेरिकी मार्केट ने अपनी सबसे बड़ी गिरावट देखी। वहीं, क्रूड ऑयल ने 110 डॉलर प्रति बैरल की कीमत छू ली। ईरान ने शुक्रवार को होर्मुज स्ट्रेट में तीन जहाजों को रोक लिया और चेतावनी दी है कि गैर-सहयोगी देशों के जहाजों ने यहां से गुजरने का प्रयास किया तो बुरा अंजाम होगा।

हमले जारी । ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि ईरान के साथ बैकडोर बातचीत चल रही है। ईरान इससे इनकार कर रहा है और इसकी वजह यह भी हो सकती है कि ट्रंप का रवैया अनिश्चित है। वह खुद तो समझौते की बात कर रहे हैं, पर सहयोगी इस्राइल ने तेहरान के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इस माहौल में बातचीत होना बहुत मुश्किल है, पहले सही परिस्थितियां बनानी होंगी।

समाधान हो लक्ष्य । युद्ध शुरू होने के एक महीने बाद अमेरिका और इस्राइल के लक्ष्य अब अलग-अलग दिखने लगे हैं। ट्रंप का समझौते की ओर झुकना घरेलू स्तर पर बढ़ते दबाव का भी नतीजा है। इस लड़ाई पर वॉशिंगटन को हर दिन लगभग एक अरब डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। अनुमान है कि 2025 में जो महंगाई दर 2.6% थी, वह इस साल 4.2% हो सकती है। यही हालात कमोबेश पूरी दुनिया में हैं। होर्मुज बंद होने से सभी देश तेल-गैस को लेकर दिक्कत महसूस कर रहे हैं। सभी के हित में है कि इन 10 दिनों में कोरे दावों और तनाव बढ़ाने वाले बयानों के बजाय सार्थक समाधान की ओर बढ़ा जाए।