दुनिया आज युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव, हथियारों की होड़, आतंकवाद, पर्यावरण संकट, असंतुलित आर्थिक विकास, परिवारों के टूटने, सामाजिक बुराइयों, मानवाधिकारों के उल्लंघन जैसी कई समस्याओं से जूझ रही है। इनके समाधान के लिए महावीर का दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना हजारों वर्ष पहले था।
आज विश्व शांति के लिए ‘जीओ और जीने दो’, ‘ अहिंसा परमो धर्मः’ के मूलमंत्र को वैश्विक स्तर पर अपनाने की जरूरत है। महावीर कहते हैं, 'सभी जीव एक-दूसरे पर आश्रित हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। यानी संसार का कोई भी प्राणी अकेला नहीं जी सकता। सूक्ष्म से लेकर स्थूल जीव तक, सभी एक-दूसरे के सहयोग से जीते हैं।' लेकिन, दुनिया के कुछ देशों में युद्ध जारी है। पड़ोसी देश होने के बावजूद भारत-पाकिस्तान के बीच अच्छे रिश्ते नहीं हैं। ऐसे में अहिंसा ही एक ऐसा हथियार है, जिससे पूरी दुनिया में शांति कायम हो सकती है। अहिंसा किसी के मन में बदले की भावना पनपने नहीं देती और एक-दूसरे की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
महावीर का अहिंसा का सिद्धांत सभी जीव जंतुओं से लेकर पेड़-पौधों तक पर लागू होता है। उनके सिद्धांत पेड़ पौधों को अनावश्यक काटने, नष्ट करने के साथ अन्य पर्यावरण रोधी गतिविधियों के विरोध में है। महावीर का अपरिग्रह का सिद्धांत सीधे तौर पर उपभोक्तावादी परिपाटी से जुड़ा है। कम संसाधनों का उपयोग और लालच का त्याग करना किसी वस्तु की कमी की समस्या को कम कर सकता है।अपरिग्रह के पालन से जमाखोरी और कालाबाजारी से छुटकारा मिल सकता है। आवश्यकता से अधिक उपलब्ध संसाधनों को जरूरतमंदों में बांट दें तो भाईचारा और प्रेम बढ़ेगा। महावीर के 'अनेकांतवाद' के जरिए हम सांप्रदायिक तनावों को कम कर सकते हैं। यह सिखाता है कि सत्य एकांगी नहीं है, और दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान करना चाहिए। एक विचार को सात तरीकों से सोचा जा सकता है। आज के दौर में AI को महावीर के सप्तभंगी सिद्धांत से जुड़ा देख सकते हैं। यह किसी प्रश्न का एक ही जवाब नहीं देता, बल्कि कई संभावनाएं दिखाता है।



