चुनाव में परिसीमन का बड़ा असर होगा

नवभारतटाइम्स.कॉम

असम में परिसीमन के बाद विधानसभा चुनाव के समीकरण बदल गए हैं। इस बार चुनाव एक चरण में हो सकता है, जिसमें 2.5 करोड़ लोग वोट देंगे। राजनीतिक दल नए उम्मीदवारों को मौका दे रहे हैं। हिमंता सरकार की योजनाओं से महिलाएं भाजपा के लिए अहम वोट बैंक बन सकती हैं।

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असम में इस बार शायद पहली बार विधानसभा चुनाव एक चरण में होगा। इसमें 2.5 करोड़ लोग वोट देंगे। परिसीमन के बाद सीटें 126 ही रहीं, लेकिन सीमाएं बदल गईं, जिससे चुनावी माहौल नया हो गया है। 2001 की जनगणना को आधार बनाने पर आलोचना भी हुई। परिसीमन से कई क्षेत्रों की बनावट बदल गई है, इसलिए इस बार चुनावी मुकाबले और नतीजों पर इसका बड़ा असर पड़ेगा। राजनीतिक दल भी अब नए उम्मीदवारों को मौका दे रहे हैं।

महिलाओं का साथ । चुनाव की तैयारी में सीटों को लेकर काफी खींचतान रही और नए क्षेत्रों में उम्मीदवारों की जीत की संभावना पर चर्चा हुई। हिमंता सरकार ने अवैध कब्जे हटाने का अभियान चलाकर समर्थन पाने की कोशिश की। महिलाओं को नकद देने वाली अरुणोदय और लखपति बाईदेव जैसी योजनाएं बड़ी उपलब्धि रही हैं। इन योजनाओं से महिलाएं पहली बार BJP के लिए अहम वोट बैंक बन सकती हैं।

जातीय समूह अहम । असम में BJP सभी 126 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। सहयोगी दलों AGP और BPF के साथ सीट बंटवारा करेगी। खासकर, बोडोलैंड क्षेत्र में गठबंधन बनाए रखना उसके लिए चुनौती रहा है, इसलिए उसे UPPL और BPF जैसे दलों से समझौता करना पड़ा। असम में जातीय समूह हमेशा राजनीति में अहम रहे हैं। हाल में छह समूहों ने ST दर्जे की मांग की, जिस पर BJP ने सक्रिय रणनीति बनाई। इसका मकसद ऊपरी असम में नेतृत्व की कमी को पूरा करना भी है।

मुश्किल में कांग्रेस । सवाल है कि मूल निवासी बहुल ऊपरी असम में क्या कांग्रेस के गौरव गोगोई सत्ता विरोधी वोट खींच सकते हैं? 2024 के लोकसभा चुनाव में जोरहाट से जीत हासिल करने वाले गौरव ने भी विधानसभा चुनाव में अपना नामांकन दाखिल किया है।

क्षेत्रीय दल अहम । ऊपरी असम में गौरव को हर जगह एक-सा समर्थन नहीं मिलेगा। वह रोड शो और यात्राएं कर रहे हैं। यहां मुकाबला सिर्फ दो मुख्य पार्टियों के बीच नहीं है, क्षेत्रीय पार्टियां भी गठबंधनों में अहम हैं। कांग्रेस के सहयोगी दलों ने तैयारी में बहुत समय ले लिया, जो उनके लिए परेशानी की बात हो सकता है। इसके अलावा NDA को सत्ता में रहने का फायदा भी मिलेगा।

जनता का फैसला । कांग्रेस के सामने इस चुनाव में सबसे बड़ा काम नए गठबंधन बनाना है। हेमंत सोरेन की JMM 31 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, खासकर चाय-जनजाति और आदिवासी इलाकों में। इससे चुनाव बाद कांग्रेस को ताकत मिल सकती है। गौरव गोगोई के खिलाफ बयानबाजी और मुख्यमंत्री पर जमीन कब्जे के आरोप भी सामने आए हैं। असम की जनता अब विकास, बेदखली, नकद योजना या पारदर्शिता के आधार पर अपने वोट का फैसला करेगी।

(लेखिका डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रफेसर है)