बातों में मधु

नवभारतटाइम्स.कॉम

संस्कृत का प्राचीन शब्द 'मधु' केवल शहद का पर्याय नहीं है। यह वसंत ऋतु, प्रेम और नवजीवन का प्रतीक है। 'मधु' का अर्थ प्रिय और मनभावन भी है। जीवन में आनंद आने पर 'मधु बरसने' की बात कही जाती है। भगवान विष्णु मधुसूदन कहलाए। यह शब्द भाषा को भी समृद्ध करता है। मधुमेह इसी शब्द से बना है।

madhu not just sweetness a symbol of life and essence of language

मधु संस्कृत का एक अत्यंत प्राचीन और समृद्ध शब्द है। इसका मूल अर्थ है शहद, यानी प्रकृति की निर्मल मिठास। यही मधु जब फूलों से झरता है, तो मकरंद बन जाता है। पर मधु केवल स्वाद तक सीमित नहीं, यह वसंत ऋतु का भी प्रतीक है, जब प्रकृति नवजीवन से भर उठती है। इसलिए ‘मधु मास’ (चैत्र) प्रेम, उल्लास और नवचेतना का प्रतीक माना गया है। भावनात्मक स्तर पर ‘मधु’ का अर्थ प्रिय, मधुर और मनभावन भी है- जैसे मीठी बोली के लिए मधु वाणी , मधुर संगीत और मधुर स्मृतियां हमें आनंद की लहरों की सैर कराती हैं। जब जीवन में आनंद उमड़ता है, तो कहा जाता है कि मधु बरस रहा है। पौराणिक कथाओं में ‘मधु’ और ‘कैटभ’ दैत्यों के वध के कारण भगवान विष्णु मधुसूदन कहलाए। यह शब्द हमारी भाषा को भी समृद्ध करता है- कोयल के लिए मधुकंठ, भौरों के लिए मधुकर। साधु-संन्यासियों की वह भिक्षा जिसमें केवल पका हुआ भोजन लिया जाता है, उसे मधुकरी कहते हैं। पूजा में इस्तेमाल होने वाले गुड़, घी, शहद, दही के मिश्रण का नाम इसी शब्द पर मधुपर्क हो गया। डायबिटीज जैसी बीमारी का नाम मधुमेह।