n आकाश तोमर, गाजियाबाद
इंदिरापुरम की रेजिडेंशल सोसायटी गौड़ ग्रीन एवेन्यू में लगी आग के कारण वहां रहने वाले सैकड़ों लोगों की जान खतरे में आ गई है। यहीं हालात यहां सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों का है। शहर के अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। अग्निशमन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में संचालित करीब 340 सरकारी और निजी अस्पतालों में से 90 के पास ही फायर NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं है। ऐसी स्थिति में यदि आग लगी तो आपातकाल के दौरान मरीजों, तीमारदारों और स्टाफ की जान खतरे में पड़ सकती है। इस संबंध में सीएमओ को लिखित सूचना भेजी जा चुकी है। सीएफओ राहुल पाल का कहना है कि अस्पतालों को साल में दो बार एनओसी को लेकर नोटिस भी दिया जा चुका है।
बीते साल 2025 में विशेष अभियान के दौरान शहर के 30 अस्पतालों के पास ही फायर एनओसी पाई गई थी। इसके बाद नियमित अभियान और परीक्षण के लिए टीम भेजकर जांच कराई गई। इसमें आज भी 90 अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम का समय पर परीक्षण नहीं कराया जा रहा है। कहीं अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हो चुके हैं तो कहीं स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं। कुछ अस्पतालों में इमरजेंसी एग्जिट रास्तों पर सामान रखा है, जिससे आपात स्थिति में निकासी बाधित हो सकती है। 28 सरकारी अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं है। इनमें मुरादनगर सीएचसी 50 बेड, मोदीनगर 50 बेड और डासना 50 बेड अस्पताल शामिल हैं।
एमएमजी ये कमियां मिलीं : चिंता की बात यह भी है कि शहर का प्रमुख सरकारी जिला एमएमजी अस्पताल भी फायर एनओसी के बिना ही संचालित हो रहा है। प्रतिदिन हजारों मरीज और उनके परिजन यहां इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में ओपीडी, इमरजेंसी, वार्ड और ऑपरेशन थिएटर सहित कई हिस्से ऊपरी मंजिलों में हैं। ऐसे में हादसा हुआ तो स्थिति संभालना कठिन हो जाएगा। पड़ताल में अस्पताल की इमरजेंसी में डॉक्टर रूम, उपचार वार्ड में आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं मिला। पुराने जमाने की तीन बाल्टियां रखी हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं है। आने-जाने के रास्तों में कोई सिलिंडर नहीं है। सर्जिकल वाॅर्ड में पुरानी तारीख के सिलिंडर मिले। पैथोलॉजी लैब, ओपीडी, दवाई काउंटर और रजिस्ट्रेशन पर कोई सिलिंडर नहीं मिला है। एक-दो सिलिंडर लगे हैं, वे भी कई साल पुराने हैं।


