करोड़ों के घोटाले के आरोपी को डीएचए बनाने की तैयारी

नवभारतटाइम्स.कॉम

एमसीडी के हेल्थ विभाग में लगभग 30 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, घोटाले के आरोपी डॉक्टर को डायरेक्टर हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन (डीएचए) बनाने की तैयारी है। यह खरीद बाजार भाव से तीन गुना अधिक कीमत पर हुई थी। विजिलेंस विभाग की जांच पांच महीने बाद भी पूरी नहीं हुई है।

करोड़ों के घोटाले के आरोपी को डीएचए बनाने की तैयारी

एमसीडी के हेल्थ विभाग में लगभग 30 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुए कई महीने बीत चुके है। सूत्रों का कहना है कि घोटाले के आरोपी डॉक्टर को हेल्थ विभाग में डायरेक्टर हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन (डीएचए) बनाने की तैयारी चल रही है। हेल्थ विभाग में इस समय यह सबसे बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है कि किसी दागी अधिकारी को इतना बड़ा चार्ज कैसे सौंपा जा सकता है। घोटाले से जुड़े पूरे मामले में डीएचए ने ही प्राथमिक जांच कराने के बाद नियमों को ताक पर रखकर की गई करोड़ों रुपये की खरीद को गलत बताते हुए इस मामले में विजिलेंस जांच के लिए भेजा था। पांच महीने बाद भी विजिलेंस विभाग की ओर से आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल न करना आपसी साठगांठ की ओर इशारा कर रहा है।

सूत्रों का कहना है कि हेल्थ विभाग की ओर से प्राइमरी हेल्थ केयर के नाम पर 2024-25 के दौरान लगभग 30 करोड़ का गैरजरूरी सामान खरीदा गया। यह खरीद बाजार भाव से तीन गुना अधिक कीमत पर हुई। मामले की शिकायत सेंट्रल विजिलेंस कमिशन के पास पहुंची तो उन्होंने जांच के निर्देश दिए। शुरुआती जांच में आरोप सही पाए गए तो विजिलेंस विभाग की ओर से करीब पांच महीने पहले मामले की जांच शुरू की थी। शिकायत में कहा गया है कि जो सामान खरीदा गया, उसकी किसी भी यूनिट से कोई डिमांड नहीं भेजी गई थी और हेल्थ विभाग के स्टोर्स में यह सामान पहले से भरा हुआ था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि एक ही सामान को कुछ ही अंतराल पर एक से अधिक बार खरीदा गया।

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