n सुनील गौड़, फरीदाबाद
औद्योगिक नगरी में स्मार्ट सिटी के दावों के बीच सीवर सफाई का कड़वा सच बार-बार सामने आ रहा है। सुरक्षा उपकरणों और तय मानकों की अनदेखी के कारण सफाई कर्मचारियों की जान जोखिम में डाली जा रही है, और जहरीली गैसों से दम घुटने की घटनाएं आम होती जा रही हैं।
हालिया मामला शनिवार शाम सेक्टर-84 में सामने आया, जहां लापरवाही ने दो जिंदगियां निगल लीं। एक बार फिर यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर जिम्मेदार कब जागेंगे? यह दुर्घटनाएं निजी और सरकारी दोनों तरह के सीवर कार्यों में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को दर्शाती हैं। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी उल्लघंन किया जा रहा है। कर्मचारियों को सीवर में उतरने की खास ट्रेनिंग नहीं दी जाती।
सेक्टर-84 स्थित पूरी प्राणायाम सोसायटी के पास रोड पर बने सीवर मैनहोल में सफाई के दौरान सुनील और राजेंद्र सिंह की दम घुटने से मौत हो गई। दोनों बीपीटीपी कंपनी के कर्मचारी थे। बताया जा रहा है कि वे शाम को सीवर की सफाई के लिए उतरे, लेकिन वापस नहीं लौटे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मैनहोल में उतारा गया, जिससे जहरीली गैस की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के ये हैं आदेश : सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी प्राइवेट कंपनियों के सामने असरहीन नजर आते हैं। एडवोकेट आरके गौड़ का कहनाहै कि 20 अक्टूबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि बिना सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतरना अपराध है। ऐसी मौतों में सख्त जवाबदेही तय हो, मुआवजा बढ़ाया जाए। उल्लंघन पर पांच साल तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन इन आदेशों की लगातार अनदेखी हो रही है।


