n NBT रिपोर्ट, फरीदाबाद
अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर छात्रों का गुस्सा खुलकर सामने आया है। एक मई की शाम और दो मई की देर रात छात्रों ने संस्थान की बदहाल स्थिति के विरोध में नारेबाजी करते हुए प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। छात्रों का कहना है कि कॉलेज को वर्ष 2020 में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से मान्यता मिलने और 2022 में पहला बैच शुरू होने के बावजूद अब तक बुनियादी ढांचा पूरी तरह विकसित नहीं हो सका है। शुरुआत में अस्पताल में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं थीं और ओपीडी सेवाएं भी चालू नहीं थीं। फिलहाल ओपीडी तो शुरू हो चुकी है, लेकिन मरीजों की संख्या बेहद कम है, जबकि आईपीडी सेवाएं अभी भी पूरी तरह संचालित नहीं हो पाई हैं। इससे छात्रों की क्लिनिकल ट्रेनिंग पर सीधा असर पड़ रहा है।
आरोप है कि कई बार डीन और निदेशक को समस्याओं से अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। परीक्षा के दौरान भी छात्रों को इन्हीं परेशानियों के बीच पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे 2022 बैच के छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कॉलेज में बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। खराब वायरिंग, जनरेटर और बिजली पैनल की दिक्कतों के कारण पढ़ाई बार-बार बाधित होती है। वहीं, पानी की आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं है और पीने के पानी की कमी बनी रहती है। इसके अलावा जनरल मेडिसिन, रेडियोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्री रोग और मनोरोग विभागों में फैकल्टी की भारी कमी है।
अन्य विभाग भी सीमित स्टाफ के भरोसे चल रहे हैं, जिससे नियमित कक्षाएं और क्लिनिकल शिक्षण तय मानकों के अनुसार नहीं हो पा रहा। हालांकि, कॉलेज प्रबंधन ने स्वीकार किया है कि कुछ समस्याएं सामने आई थीं, जिन्हें तुरंत दूर कर दिया गया है। साथ ही बाकी कमियों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द सुलझाने का आश्वासन दिया गया है। वहीं स्टूडेंट्स इस मसले पर हल चाहते हैं।


