nNBT रिपोर्ट, लखनऊ : लखनऊ कमिश्नरेट में रिजर्व पुलिस लाइंस में फैले भ्रष्टाचार के संबंध में सिपाही के विडियो जारी करने के बाद गणना कार्यालय में नियुक्त 12 पुलिसकर्मियों को तो हटा दिया गया, पर आरआई और अन्य पुलिस अधिकारियों के पास अब भी चार्ज है। सिपाही ने इस मामले में डीजीपी से उच्च स्तरीय जांच समिति गठित किए जाने की मांग की है।
लखनऊ रिजर्व पुलिस लाइंस में तैनात 2015 बैच के सिपाही सुनील शुक्ला ने विडियो जारी कर पुलिस लाइंस में फैले भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उसने इस मामले में सीएम योगी से जांच की गुहार लगाई थी।
इन्हें हटाया गया : इस मामले में लखनऊ पुलिस ने एक्स पर पोस्ट कर अपडेट किया था कि उच्च स्तरीय समिति की ओर से से जांच की जा रही है। पुलिस लाइंस का पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारी जांच समिति में शामिल नहीं है। जांच निष्पक्ष हो इसलिए गणना कार्यालय में नियुक्त 1 एसआई, 2 हेड कॉन्स्टेबल और 9 कॉन्स्टेबल को गणना कार्यालय से हटा दिया गया हैयही नहीं गणना कार्यालय में ड्यूटी आवंटन की प्रक्रिया सॉफ्टवेयर के जरिए कर दी गई है, जिससे बिना भेदभाव के निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से ड्यूटी आवंटित की जा सके। इस मामले में सिपाही सुनील का कहना है कि सिर्फ गणना कार्यालय से 12 पुलिसकर्मियों को हटाने से क्या होगा। उसने आरआई और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए किए थे। पर आरआई और अन्य पुलिस अधिकारी तो चार्ज पर ही हैं। ऐसे क्या बिना किसी दबाव के जांच हो सकेगी। सिपाही सुनील का कहना है कि अन्य लोगों को भी चार्ज से हटाया जाना चाहिए।
उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई जाए : सिपाही सुनील शुक्ला ने मंगलवार को जांच समिति के सामने पेश होकर अपने बयान दर्ज कराए। अपना पूरा पक्ष रखा। लखनऊ,रायबरेली और अम्बेडकर नगर में पुलिस लाइंस में फैले भ्रष्टाचार के बारे में जानकारी दी। सिपाही का कहना है कि इस मामले में डीजीपी को उच्च स्तरीय जांच समिति बनानी चाहिए। उस समिति में सुनील को भी शामिल किया जाए। जिससे कि व्यवस्था में बदलाव लाया जा सके। सुनील का कहना है कि भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए निष्पक्ष रूप से फैसले लेने होंगे। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन करनी होगी।

