वेतन न मिलने पर चंडीगढ़ जाएंगे NHM कर्मचारी

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एनएचएम कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। वे 17 मई तक बकाया वेतन और मांगों पर फैसले की उम्मीद कर रहे हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो 18 मई को हजारों कर्मचारी चंडीगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री से मिलेंगे। कर्मचारियों को नियमित करने, सातवें वेतन आयोग का लाभ और अन्य सुविधाओं की मांगें लंबित हैं।

nhm employees to march to chandigarh over unpaid salaries warning issued to health minister

n NBT न्यूज, गुड़गांव

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी संघ ने लंबित मांगों और वेतन संबंधी समस्याओं को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई है। संघ का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। संघ ने स्वास्थ्य मंत्री से मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील करते हुए साफ किया है कि यदि 17 मई तक मार्च और अप्रैल माह का बकाया वेतन जारी नहीं किया गया और मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया तो 18 मई को प्रदेशभर से NHM कर्मचारी चंडीगढ़ पहुंचकर स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय में महा प्रतिनिधिमंडल के रूप में बात करेंगे।

संघ का आरोप है कि पिछले एक साल से कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा, जिससे हजारों परिवार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा कि 25 साल से स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद सरकार ने न तो नियमितीकरण की नीति लागू की और न ही वेतन व सुविधाओं में सुधार किया। एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हरिराज ने बताया कि कर्मचारियों को नियमित करने को लेकर कई कर्मचारियों को उच्च न्यायालय से राहत मिलने के बाद भी सरकार ने फैसलों को लागू नहीं किया। इतना ही नहीं स्वास्थ्य मंत्री और मिशन निदेशक के साथ कई दौर की बातचीत होने के बावजूद मांगें अब तक लंबित हैं। उन्होंने कहा कि यदि 17 मई तक सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो पूरे प्रदेश से बड़ा प्रतिनिधिमंडल चंडीगढ़ पहुंचेगा और स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत करेगा। कर्मचारियों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए इसमें हजारों कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना है। संघ ने कर्मचारियों के नियमितीकरण, सातवें वेतन आयोग का लाभ, लंबित वेतन भुगतान, समान कार्य के लिए समान वेतन, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, अवकाश सुविधाएं और सीएचओ कर्मचारियों के लंबित भत्तों के भुगतान की मांग उठाई है। संघ ने कहा कि कर्मचारियों की लगातार अनदेखी का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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