NBT रिपोर्ट, नई दिल्ली : पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने बुधवार को 37500 करोड़ रुपये की इंसेंटिव स्कीम को मंजूरी दी, जिससे कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा। पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते कच्चे तेल और एलपीजी के मोर्चे पर बढ़े संकट के बीच यह अहम फैसला किया गया। इससे इन चीजों के आयात पर निर्भरता घटेगी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस स्कीम के लिए 37500 करोड़ रुपये का आवंटन तय किया गया है और इसमें लगभग 3000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। उन्होंने कहा कि 7.5 करोड़ टन कोयले के गैसीफिकेशन के प्रोजेक्ट्स अवॉर्ड किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश में 40 करोड़ टन से ज्यादा कोयला भंडार है, जो 200 वर्षों के लिए पर्याप्त है। वैष्णव ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यह आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा फैसला है।
कोल गैसीफिकेशन का मतलब कोयले को सिंथेटिक गैस में बदलने से है, जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। इससे मेथेनॉल, फर्टिलाइजर और केमिकल्स बनाने में मदद मिलती है। वैष्णव ने कहा कि अभी देश की जरूरत के LNG का 50% से ज्यादा आयात करना पड़ता है, लेकिन इस योजना से आयात घटेगा। अभी अमोनिया का पूरा आयात करना पड़ता है, लेकिन अमोनिया प्रोडक्शन की राह बनेगी। मेथेनॉल अभी 90% तक इंपोर्ट होता है, उसका भी देश में उत्पादन बढ़ेगा।
इस स्कीम के तहत प्लांट और मशीनरी की लागत का 20% तक इंसेंटिव दिया जाएगा।


