दोनों की ज़रूरत

नवभारतटाइम्स.कॉम

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप चीन के दौरे पर हैं। यह मुलाकात व्यापार से बढ़कर वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर केंद्रित है। ईरान संकट दोनों देशों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है। टैरिफ की लड़ाई के बावजूद, आपसी निर्भरता के कारण दोनों देश सहयोग का रास्ता तलाश रहे हैं। चीन को अमेरिका सबसे बड़ा बाजार चाहिए।

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डॉनल्ड ट्रंप हर रिश्ते को फायदे और नुकसान के नजरिये से देखते हैं, लेकिन चीन के अपने दौरे को लेकर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ व्यापार नहीं, वैश्विक रणनीतिक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले साल अक्टूबर में जब आखिरी बार ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात हुई थी, तब मुख्य मुद्दा टैरिफ था, अब जाहिर तौर पर ईरान भी होगा। पश्चिम एशिया संकट ने दोनों देशों के लिए मुश्किलें बढ़ाई हैं और आपसी तनाव के बावजूद वे सहयोग का रास्ता तलाशने की कोशिश करेंगे।

टैरिफ की लड़ाई । लगभग एक दशक बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति चीन पहुंचा है। टैरिफ वॉर की वजह से माना जाता है कि ट्रंप का रुख पेइचिंग को लेकर कठोर है। अपने पहले कार्यकाल में ही उन्होंने चीन से होने वाले आयात पर टैरिफ की घोषणा की थी। दूसरे टर्म में वह इस लड़ाई को और आगे ले गए और 125% तक टैरिफ जड़ दिया। हालांकि रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीनी नियंत्रण की वजह से आखिरकार ट्रंप को समझौता करना पड़ा था।

आपसी जरूरत । टैरिफ वॉर भले थम गई हो, पर अमेरिका और चीन के बीच की होड़ कायम है। दोनों एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं, पर इतना नहीं जिससे बात ज्यादा बिगड़े। ईरान युद्ध के दौरान भी यह देखने को मिला है। ईरान की मदद के आरोप में अमेरिका ने कुछ चीनी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की, जबकि चीन ने वॉशिंगटन की नीतियों का विरोध किया, पर सब नियंत्रण में। इसकी वजह है आपसी निर्भरता और जरूरत।

शांति की चाह । चीन के लिए अमेरिका आज भी सबसे बड़ा बाजार है। हालांकि इस साल चीनी निर्यात में करीब 10% की कमी आई है। चीन की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए यह झटका है। खाड़ी देशों में भी उसका निर्यात घटा है। तेहरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार होने के नाते भी उसकी परेशानी बढ़ रही है। वह चाहता है कि युद्ध जल्दी थमे। दूसरी ओर, ट्रंप को ईरान पर समर्थन और निवेश के लिए चीन चाहिए। इसीलिए वह अपने साथ कई बड़े उद्यमियों को लेकर पहुंचे हैं। अमेरिका इस दौरे से बड़ी डील की उम्मीद कर रहा है, खासकर बोइंग विमानों की।

डील की उम्मीद । आलोचकों को डर है कि ताइवान पर ट्रंप नरम पड़ सकते हैं। फिर भी, इस समय दोनों नेता घरेलू मोर्चे पर असहज स्थितियों में फंसे हैं और उनकी कोशिश यही होगी कि इस मुलाकात से कुछ बड़ा हासिल किया जाए। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अगर सहयोग के रास्ते पर बढ़ती हैं और ईरान में शांति कायम होती है, तो सभी का फायदा होगा।