नेहरू पार्क के बीच थ्री पीस सूट में खड़े लेनिन

नवभारतटाइम्स.कॉम

दिल्ली के नेहरू पार्क में व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति है। इसी तरह हो ची मिन्ह की प्रतिमा भी स्थापित है। भारत में कई विश्व नेताओं के नाम पर सड़कें भी हैं। लेनिन भारत कभी नहीं आए, लेकिन हो ची मिन्ह 1958 में दिल्ली आए थे। उन्होंने महात्मा गांधी के आदर्शों की सराहना की थी।

lenin in a three piece suit in nehru park statues and road names of foreign leaders in delhi

पश्चिम बंगाल में हाल में रूसी क्रांति के जनक व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को क्षति पहुंचाने की खबर आई। लेनिन की आदमकद कांस्य मूर्ति दिल्ली में भी है, चाणक्यपुरी के नेहरू पार्क के बीचोंबीच। इसकी स्थापना 1 नवंबर 1987 को की गई थी। संयोग से उसी दिन रूस की अक्टूबर क्रांति की 70वीं वर्षगांठ थी। सोवियत संघ के तत्कालीन प्रधानमंत्री निकोलाई रियाजकोव भारत आए थे और उन्होंने ही व्लादिमीर लेनिन की इस मूर्ति का अनावरण किया।

लेफ्ट का जमावड़ा । मूर्ति में लेनिन थ्री-पीस सूट में खड़े हैं। एक हाथ आगे बढ़ा हुआ, जैसे किसी सभा को संबोधित कर रहे हों। भाव और गति का अद्भुत सामंजस्य। कुछ पल ठहर कर देखने पर लगता है कि अभी बोलने वाले हैं। हर साल 22 अप्रैल को लेनिन जयंती पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और वामपंथी कार्यकर्ता यहां इकट्ठा होकर उनके विचारों पर चर्चा करते हैं।

सुंदर पार्क में हो ची मिन्ह । चाणक्यपुरी से कौटिल्य मार्ग ज्यादा दूर नहीं। इधर के एक सुंदर पार्क में वियतनाम के महान नेता हो ची मिन्ह की भव्य कांस्य प्रतिमा स्थापित है। प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी. सुतार ने इस मूर्ति को बनाया था। 1 सितंबर 2021 को वियतनाम के राष्ट्रीय दिवस पर इसका अनावरण हुआ। यह पार्क राजधानी के डिप्लोमेटिक एरिया के दिल में है। इसके आसपास पंचशील मार्ग और नीति मार्ग हैं। वियतनाम के नेता समय-समय पर यहां पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।

भारत यात्रा । लेनिन भारत कभी नहीं आए, लेकिन हो ची मिन्ह 5 से 14 फरवरी, 1958 को दिल्ली आए थे। सर्द फरवरी के उन दिनों में नए बने सप्रू हाउस में गर्मजोशी भरा माहौल था। वहां उनका नागरिक अभिनंदन हुआ। पंजाबी कवयित्री अमृता प्रीतम ने वियतनाम की जनता के संघर्ष पर अपनी मार्मिक कविता 'हम दोनों सिपाही हैं' सुनाई। हो ची मिन्ह ने महात्मा गांधी के आदर्शों की सराहना की और कहा, 'हम सब, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गांधीजी के अनुयायी हैं।'

नेताओं के नाम सड़क । दक्षिण दिल्ली में नेहरू प्लेस से सटी सड़क का नाम हो ची मिन्ह मार्ग है। वह मार्क्स, लेनिन और स्टालिन की साम्यवादी परंपरा की एशियाई कड़ी थे। हालांकि लेनिन के नाम पर दिल्ली में कोई सड़क नहीं। वैसे राजधानी में विश्व नेताओं के नाम पर अनेक सड़कें हैं। राम मनोहर लोहिया अस्पताल के करीब बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीब-उर-रहमान (बंगबंधु) के नाम पर एक सड़क है। जीवनपर्यंत रंगभेद के खिलाफ लड़ने वाले दक्षिण अफ्रीका के महानायक नेल्सन मंडेला के नाम पर नेल्सन मंडेला मार्ग वसंत कुंज इलाके में है। हौज खास में डियर पार्क से सटी सड़क गमाल अब्देल नासेर मार्ग के नाम से जानी जाती है। नेहरू और नासेर ने युगोस्लाविया के जोसेफ ब्रॉज टीटो के साथ मिलकर गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखी थी। 1983 में पंचशील एंक्लेव के डी ब्लॉक से सटी सड़क का नाम जोसेफ ब्रॉज टीटो मार्ग कर दिया गया।