इसरो की आवाज़

नवभारतटाइम्स.कॉम

इसरो की जानी-मानी वैज्ञानिक एन. वालारमथी का जन्म तमिलनाडु में हुआ था। बचपन की एक घटना ने उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने कड़ी मेहनत से इसरो में जगह बनाई। वह RISAT-1 की पहली महिला परियोजना निदेशक बनीं। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रॉकेट प्रक्षेपण के दौरान उनकी उलटी गिनती 'वॉयस ऑफ इसरो' के नाम से मशहूर हुई।

voice of isro n valarmathis inspiring journey and story of becoming voice of isro

इसरो की प्रसिद्ध वैज्ञानिक एन. वालारमथी का जन्म 31 जुलाई 1959 को तमिलनाडु के अरियालुर में हुआ था। बचपन से ही वह जिज्ञासु और प्रतिभाशाली थीं। स्कूल में उनकी शिक्षिका एक दिन स्वामी विवेकानंद के विचार समझा रही थीं। उन्होंने कहा, 'एकाग्र मन अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भी प्राप्त कर सकता है।' इसके बाद शिक्षिका बच्चों को प्रांगण में ले गईं और लेंस के माध्यम से सूर्य की किरणों को कागज पर केंद्रित किया। कुछ ही क्षणों में कागज जल उठा। यह देखकर नन्हीं वालारमथी आश्चर्य से भर उठीं। शिक्षिका ने कहा, 'यह कोई चमत्कार नहीं, एकाग्र ऊर्जा की शक्ति है। यदि तुम भी पूरी लगन से पढ़ाई करोगी, तो एक दिन सूर्य की तरह चमकोगी।' यह बात वालारमथी के मन में गहराई से बैठ गई। उन्होंने कठिन परिश्रम और एकाग्रता के बल पर ISRO में स्थान बनाया। वह RISAT-1 की पहली महिला परियोजना निदेशक बनीं। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रॉकेट प्रक्षेपण के दौरान उनकी दमदार उलटी गिनती इतनी प्रसिद्ध हुई कि वह 'वॉयस ऑफ इसरो' के नाम से पहचानी जाने लगीं। उनका जीवन आज भी छात्रों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देता है।