सातवें साल भी बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम

नवभारतटाइम्स.कॉम

प्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम है। लगातार सातवें साल भी दरें स्थिर रह सकती हैं। राज्य सलाहकार समिति की बैठक में इस पर अंतिम निर्णय होगा। उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर बकाया 51 हजार करोड़ रुपये एक बड़ा कारण है। अगले साल होने वाले चुनाव भी दरों में बढ़ोतरी न होने की वजह बन सकते हैं।

electricity rates in up likely to remain stable for the 7th consecutive year important meeting on may 20

n NBT रिपोर्ट, लखनऊ : प्रदेश में लगातार 7वें साल बिजली दरें स्थिर रहेंगी या फिर कीमतों में बढ़ोतरी होगी, इस पर निर्णय जल्द होगा। प्रदेश में नई बिजली दरें निर्धारित करने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। इसको लेकर 20 मई को राज्य सलाहकार समिति की अहम बैठक होगी। सूत्रों का दावा है कि लगातार सातवें साल भी यूपी में बिजली की दरें स्थिर रह सकती हैं।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक इस साल भी बिजली की दरें नहीं बढ़ने दी जाएंगी। इसकी सबसे बड़ी वजह बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का बकाया 51 हजार करोड़ रुपये है। जब तक यह रकम समायोजित नहीं होती है, तबतक दरें नहीं बढ़ाई जा सकतीं।

पूरी हो चुकी है जनसुनवाई की प्रक्रिया : इस साल मार्च और अप्रैल में बिजली दरें तय करने के लिए जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर जा चुकी है। इसमें बिजली कंपनियों द्वारा पेश किए गए दावों के आधार पर जनता के बीच मामलों की सुनवाई नियामक आयोग ने की थी। अब 20 मई को राज्य सलाहकार समिति की बैठक में आखिरी दौर की चर्चा बाकी है। बिजली कंपनियों बिजली आपूर्ति में आने वाले खर्च और उसके एवज में हुई वसूली में 21 हजार करोड़ रुपये का अंतर दिखाते हुए इसकी भरपाई की मांग नियामक आयोग से की है। अगर भरपाई के लिए यह अंतर सही पाया जाता है तो बीते साल की तुलना में इस साल बिजली के दाम 20 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। हालांकि, बिजली कंपनियों में हुई सुनवाई में इस 21 हजार करोड़ के अंतर पर तमाम सवाल उठे हैं। वहीं, पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटर लगाने के एवज में इस साल 3838 करोड़ रुपये का खर्च दिखाते हुए इसे भी नई दरें तय करते हुए शामिल करने की मांग नियामक आयोग से की है। हालांकि, स्मार्ट मीटर का खर्च उपभोक्ताओं से न लेने के केंद्र सरकार के आदेश के बाद इस खर्च को भी समायोजित करने की संभावनाएं कम हैं।

अगले साल चुनाव भी वजह : अगले साल यूपी में चुनाव हैं। ऐसे में बिजली दरों में बढ़ोतरी न होने के राजनीतिक कारण भी तलाशे जा रहे हैं। अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में संभावना बहुत कम है कि बिजली दरों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी की जाए।