तीन भाषा पढ़ाने का फॉर्मूला

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सीबीएसई ने नौवीं कक्षा से तीन भाषाएं पढ़ाने का नया फॉर्मूला शुरू किया है। इसमें दो भाषाएं भारतीय होंगी। नई किताबें जल्द ही उपलब्ध होंगी। तीसरी भाषा के लिए कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर होगा और अंक फाइनल मार्कशीट में जुड़ेंगे। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लागू किया गया है।

cbses new decree three language formula to be implemented from 9th grade know full details

Bhupender.Sharma

@timesofindia.com

n नई दिल्ली : सीबीएसई ने मौजूदा सेशन से 9वीं कक्षा के लिए तीन भाषा पढ़ाने का फॉर्म्युला लागू किया है। शिक्षा मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक सीबीएसई और एनसीईआरटी मिलकर किताब तैयार कर रहे हैं और जल्द ही छात्रों को नई किताबें मिल सकेंगी।

संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 आधिकारिक भाषाएं सूचीबद्ध हैं और हिंदी, उर्दू, संस्कृत की नई किताबें आ गई हैं। बाकी 19 भाषाओं का कोर्स नैशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के आधार पर सीबीएसई ने तैयार कर लिया है। NCERT इन सभी भाषाओं की किताबें जुलाई तक जारी करेगा। जब तक किताबें नहीं आतीं, तब तक छात्र छठी की किताबों से नई भाषा की बेसिक जानकारी हासिल करेंगे। छठी से दसवीं तक के छात्रों को तीन भाषा पढ़नी होंगी, जिसमें से दो भारतीय होंगी। 2026-27 के सत्र में 9वीं के छात्र तीन भाषा पढ़ेंगे, लेकिन इस बार जो 10वीं में आएं हैं, वे दो भाषा ही पढ़ेंगे। तीसरी भाषा (R3) के लिए कोई बोर्ड एग्जाम नहीं होगा। स्कूलों में ही मूल्यांकन होगा और इसके नंबर या ग्रेड CBSE की फाइनल मार्कशीट में शामिल होंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में त्रिभाषा फॉर्मूला के तहत छात्रों को तीन भाषाएं सीखनी जरूरी है और यह नियम देशभर के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों पर लागू होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूली स्तर से ही बहुभाषावाद को बढ़ावा देने के लिए त्रिभाषा फॉर्म्युला लागू करने की सिफारिश की गई है। शिक्षा मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि तीन भाषाएं राज्यों, क्षेत्रों और निश्चित रूप से स्वयं छात्रों की पसंद होंगी। तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय होंगी। जो स्टूडेंट्स विदेशी भाषा पढ़ना चाहते हैं, वे ऐसा तीसरी भाषा के तौर पर उसे चुन सकते हैं। भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी के अलावा, माध्यमिक स्तर के छात्र कोरियाई, जापानी, फ्रेंच, जर्मन और स्पैनिश जैसी विदेशी भाषाएं भी सीख सकते हैं। जैसे 9वीं में अगर कोई तीसरी भाषा के तौर पर संस्कृत को चुनता है तो उसे 6वीं की R3 किताबों से अभी पढ़ाई करवाई जाएगी ताकि बेसिक जानकारी हो सके। विशेषज्ञों का कहना है कि भाषा की बुनियादी योग्यताओं में 75 से 80 प्रतिशत तक समानता होती है, इसलिए छठी की किताबों को आधार बनाया गया है। बाकी भारतीय भाषाओं के लिए राज्य स्तर (SCERT) के संसाधनों का उपयोग किया जा सकेगा।

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