Katyayani.Upreti
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n नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) 2026-27 की अचानक लागू की जा रही तीन भाषाओं की नीति पर देशभर में सवाल उठ रहे हैं। अहम सवाल है कि सेशन शुरू होने के तीन महीने बाद 9वीं-10वीं में भाषाओं की पढ़ाई में अचानक बदलाव क्यों? CBSE की 19 भाषाओं की लिस्ट में से दो भारतीय भाषाएं चुनें कैसे? CBSE ने 2026-27 सेशन की शुरुआत के बाद पहले क्लास 6 के लिए दो भारतीय भाषाओं की अनिवार्यता के साथ 3 भाषाओं की नई पॉलिसी लॉन्च की थी। स्कूल इसे बिना तैयारी की लैंग्वेज पॉलिसी बता रही है, तो पैरंट्स का कहना है कि अचानक तीसरी भाषा का दबाव बच्चों पर है। दो भारतीय भाषाओं पर मामला भी राजनीति के मैदान में है। खासतौर पर कहा जा रहा है कि उत्तर भारत समेत कुछ शहरों में इस नीति के साथ संस्कृत को थोपा जा रहा है।
क्लास 9 और 10 में अब तीन भाषाएं (R1, R2, R3) होंगी, जिनमें दो भाषाएं भारतीय होंगी। अब तक स्टूडेंट्स दो भाषा पढ़ते रहे हैं। तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, बल्कि स्कूल स्तर पर इंटरनल असेसमेंट होगा। माउंट आबू स्कूल की प्रिंसिपल ज्योति अरोड़ा ने कहा कि यह सेशन शुरू होने से पहले लाना चाहिए था क्योंकि डेढ़ महीने की पढ़ाई हो चुकी है। इस अचानक आए फैसले से टाइमटेबल बदलना होगा, टीचर्स की व्यवस्था करनी होगी। अब संस्कृत दूसरी भारतीय भाषा होगी यानी संस्कृत के टीचर्स का प्रेशर बढ़ेगा, नए टीचर्स रखने होंगे। क्लास 9 के कई स्टूडेंट्स अब ऐसे होंगे, जिन्होंने क्लास 6 से 8 तक संस्कृत पढ़ी ही नहीं है। कई स्कूलों में तो कई स्टूडेंट्स ने इंग्लिश और एक विदेशी भाषा ली है।
मदर इंटरनैशनल स्कूल की प्रिंसिपल मिलन माला ने कहा कि हम हिंदी और संस्कृत रखेंगे। हालांकि, दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं का भी ऑप्शन देंगे। अगर किसी भाषा में 10 से ज्यादा स्टूडेंट्स हैं, तो वो पढ़ाएंगे। आईटीएल स्कूल, द्वारका की प्रिंसिपल सुधा आचार्य ने कहा कि पहली भारतीय भाषा जो बच्चे बोलते हैं, यह हिंदी के अलावा अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकती है, जैसे पंजाबी, तमिल, बंगाली, गुजराती। हालांकि दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में दूसरी भाषा संस्कृत ही होगी, क्योंकि यहां कई कम्यूनिटी के बच्चे हैं। तीसरी भाषा इंग्लिश होगी, जो ऑफिशल भी है।


