ईंट खरीदने तो किसी को रिश्तेदार बनकर बैंक खातों में लगाई सेंध

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फरीदाबाद में साइबर ठगी के मामले बढ़ रहे हैं। ठग ईंट खरीदने के बहाने, रिश्तेदार बनकर और बैंक खातों से पैसे निकालकर लोगों को लाखों का चूना लगा रहे हैं। पुलिस ने तीन अलग-अलग मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

cyber thugs terror in faridabad scams under the guise of buying bricks and posing as relatives lakhs lost

n NBT रिपोर्ट, फरीदाबाद

जिले में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। साइबर अपराध थाना सेंट्रल और एनआईटी में दर्ज तीन अलग-अलग मामलों में ठगों ने लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाकर लाखों रुपये की चपत लगा दी। कहीं ईंट खरीदने के बहाने फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाकर रकम ठगी गई, तो कहीं रिश्तेदार बनकर वॉट्सऐप मेसेज भेजकर पैसे ऐंठ लिए गए। वहीं एक युवक के बैंक खाते से बिना अनुमति रकम निकाल ली गई। पुलिस ने तीनों मामलों में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पहले मामले में गांव खेड़ी कलां निवासी 47 वर्षीय विनोद कुमार साइबर ठगी का शिकार हुए। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि दो मई 2026 को उनके पास एक मोबाइल नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ईंट खरीदने वाला बताते हुए बातचीत शुरू की। आरोपियों ने फ्रॉड टेक्स्ट मेसेज भेजकर करीब 1.62 लाख रुपये की फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाई और बाद में बेटे के अस्पताल में भर्ती होने का बहाना बनाकर पैसे वापस मांगने लगे। विनोद कुमार आरोपियों की बातों में आ गए और दो व तीन मई को भेजे गए क्यूआर कोड स्कैन कर कुल 1.45 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का अहसास होने पर उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

दूसरे मामले में सैनिक कॉलोनी निवासी एक महिला ने शिकायत दी कि 24 मार्च को उनके पति सुनील चोपड़ा के मोबाइल पर एक नए नंबर से वॉट्सऐप मेसेज आया। मेसेज भेजने वाले ने खुद को उनकी बहन बताते हुए खरीदारी के लिए पैसों की जरूरत बताई। विश्वास में आकर पहले सहकर्मी के बैंक खाते से 7800 रुपये भेजे गए। इसके बाद महिला ने अपने एचडीएफसी बैंक खाते से आरोपियों द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड पर 22,500 और 50,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में असली बहन से बातचीत होने पर साइबर ठगी का पता चला।

तीसरे मामले में सेक्टर-55 निवासी हर्षित मनचंदा ने शिकायत दी कि छह मई की रात उनके पंजाब नैशनल बैंक खाते से बिना अनुमति करीब 10 हजार रुपये निकाल लिए गए। हर्षित के अनुसार उन्होंने किसी के साथ बैंक संबंधी जानकारी साझा नहीं की थी, इसके बावजूद खाते से रकम कट गई। साइबर अपराध एनआईटी थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। कभी रिश्तेदार बनकर, कभी व्यापारिक लेनदेन के बहाने और कभी फर्जी लिंक या क्यूआर कोड भेजकर लोगों से ठगी की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के भेजे गए क्यूआर कोड को स्कैन न करें और बिना पुष्टि किए पैसे ट्रांसफर करने से बचें। गड़बड़ लगने पर पुलिस को सूचना दें।

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